राम कथा केवल आयोजन नहीं, आत्मशुद्धि का माध्यम है” संजीव शर्मा, अध्यक्ष राधे-राधे सेवा समिति

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लालकुआँ

राम कथा केवल आयोजन नहीं, आत्मशुद्धि का माध्यम है”
संजीव शर्मा, अध्यक्ष राधे-राधे सेवा समिति
प्रश्न: श्री राम कथा के विराम दिवस पर आपके मन में क्या भाव हैं?
उत्तर (संजीव शर्मा):
आज मन भावुक भी है और आनंदित भी। सात दिनों तक प्रभु श्रीराम की कथा सुनने के बाद ऐसा लगता है मानो आत्मा को एक नया प्रकाश मिला हो। यह विराम नहीं, बल्कि हमारे जीवन में राम तत्व के प्रवेश का प्रारम्भ है।
प्रश्न: इस भव्य श्री राम कथा के आयोजन का मूल उद्देश्य क्या था?
उत्तर:
हमारा उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं था, बल्कि समाज को मर्यादा, सत्य, करुणा और सेवा के मार्ग पर प्रेरित करना था। श्रीराम का जीवन आज के समय में सबसे बड़ा मार्गदर्शक है—चाहे वह परिवार हो, समाज हो या राष्ट्र।
प्रश्न: कथा वाचक व्यास डॉ० पंकज मिश्रा ‘मयंक’ के वाचन को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर:
डॉ० पंकज मिश्रा मयंक जी ने कथा को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हृदय से हृदय तक पहुँचाया। उनकी वाणी में शास्त्रों की गहराई भी थी और आम जन के जीवन से जुड़ा सरल संदेश भी। उन्होंने राम कथा को जीने की प्रेरणा दी।
प्रश्न: विराम दिवस पर उमड़ी भारी श्रद्धालु भीड़ को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर:
यह भीड़ नहीं, यह श्रद्धा का सैलाब था। इससे स्पष्ट है कि आज भी समाज राम को अपने जीवन का आधार मानता है। लालकुआँ की जनता ने यह सिद्ध कर दिया कि अध्यात्म आज भी जीवित है, जागृत है।
प्रश्न: समिति के लिए यह आयोजन कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
उत्तर:
चुनौतियाँ थीं, लेकिन सेवा भाव के आगे सब छोटी लगती हैं। समिति के प्रत्येक सदस्य, स्वयंसेवक, मातृशक्ति और युवाओं ने तन-मन-धन से सहयोग किया। यह आयोजन एक व्यक्ति का नहीं, पूरे समाज का प्रयास था।
प्रश्न: आज की युवा पीढ़ी के लिए श्री राम कथा क्या संदेश देती है?
उत्तर:
युवाओं के लिए राम कथा सबसे बड़ा संदेश है—कर्तव्य, अनुशासन और चरित्र निर्माण। श्रीराम का जीवन सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
प्रश्न: भविष्य में राधे-राधे सेवा समिति की क्या योजनाएँ हैं?
उत्तर:
हम आगे भी धार्मिक, सामाजिक और सेवा के कार्यों को निरंतर करते रहेंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में संस्कार, सद्भाव और सकारात्मक सोच का संचार हो।
प्रश्न: अंत में आप श्रद्धालुओं और नगरवासियों से क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर:
मैं हृदय से सभी श्रद्धालुओं, नगरवासियों, प्रशासन, मीडिया और समिति के प्रत्येक सहयोगी का आभार व्यक्त करता हूँ। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि उनका आशीर्वाद सभी पर बना रहे और हम सब उनके आदर्शों पर चल सकें।

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कथा थमी नहीं, जीवन में उतर गई,
राम की मर्यादा हर मन में बस गई।

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