कुशण्डी ऋषि की तपोभूमि कुचौली में हवन-यज्ञ से लौटी रौनक, पलायन रोकने की दिशा में प्रेरक पहल

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बागेश्वर।
महर्षि कुशण्डी ऋषि की पावन तपोभूमि कुचौली गाँव में आयोजित नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का शुक्रवार को हवन-यज्ञ एवं विशाल भण्डारे के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा की विशेष अनुभूति हुई। वर्षों बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति से गाँव में नई चेतना और रौनक का वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान संत-महात्माओं के सान्निध्य में वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न हवन-यज्ञ ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया। नौ दिनों तक चले इस आयोजन में प्रतिदिन भजन-कीर्तन, पूजन-अर्चन और धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को विशेष रूप से गरिमामय बनाया।
शुक्रवार को सम्पन्न पूर्णाहुति हवन के अवसर पर ग्रामीणों और प्रवासी लोगों की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन पहाड़ों में सामाजिक जागरण तथा ग्रामीण पुनर्जीवन के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। इस आयोजन ने स्थानीय लोगों में अपने पैतृक गाँवों के प्रति जुड़ाव की भावना को और मजबूत किया है।
यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पलायन रोकने और गाँवों में पुनः जीवन संचार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से सामाजिक एकता मजबूत होती है और युवाओं में अपने मूल स्थान से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
विशेष उल्लेखनीय योगदान इस आयोजन में यजमान दम्पति ज्योति पंत एवं योगेश पंत का रहा, जिनके प्रयासों से न केवल यह विराट धार्मिक अनुष्ठान सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ, बल्कि कुचौली गाँव में पुनः बसावट और विकास की नई उम्मीद भी जागृत हुई है। वर्षों से वीरान होते जा रहे गाँव में आधारभूत सुविधाओं के लिए निरंतर प्रयास करने, लोगों को अपनी जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करने तथा धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से गाँव को पुनर्जीवित करने की उनकी पहल को क्षेत्र में सराहनीय कदम माना जा रहा है। निस्संदेह, उनका यह प्रयास पलायन रोकने और पहाड़ों में पुनः जीवन की रौनक लौटाने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।