बिन्दुखत्ता।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री हंस प्रेम योग आश्रम, संजय नगर द्वितीय, बिन्दुखत्ता में आयोजित विराट सद्भावना सम्मेलन आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम बन गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आध्यात्मिक गुरु एवं प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने मानव धर्म को सनातन का मूल तत्व बताते हुए समाज में सर्वमंगल की भावना को आत्मसात करने का आह्वान किया।
अपने ओजस्वी संबोधन में उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, समरसता और सौहार्द का संदेश देने वाला महापर्व है, जिसे भारत ही नहीं बल्कि विश्व के अनेक देशों में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में अध्यात्म और भौतिक विकास के संतुलित समन्वय की नितांत आवश्यकता है।
पर्यटन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से “विंटर डेस्टिनेशन” की परिकल्पना को धरातल पर उतारने से सर्दियों में भी पहाड़ों की ओर पर्यटकों का आकर्षण बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म और पर्यटन के इस संगम ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की है।
भगवान शिव के चरित्र का उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को धारण करने का सामर्थ्य केवल शिव में था, इसलिए वे देवों के देव और नीलकंठ कहलाए। उन्होंने इसे त्याग, धैर्य और लोककल्याण का सर्वोच्च उदाहरण बताते हुए कहा कि आध्यात्म मनुष्य को अनुशासित और प्रेरित जीवन जीने की शक्ति देता है। जब व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है, तो वह स्वयं प्रेरित होकर व्यवस्था और कर्तव्य का निर्वहन करता है।
उन्होंने तीन प्रकार के भक्तों का उदाहरण देते हुए कहा— एक वे जो सुनकर भूल जाते हैं, दूसरे वे जो सुनकर आगे कह देते हैं, और तीसरे वे जो सुनकर उसे जीवन में उतार लेते हैं। वास्तविक साधक वही है जो सदुपदेश को अपने आचरण में धारण करे।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री अमृता रावत ने भी शिव और शक्ति के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी से धर्ममार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सद्गुरु समय-समय पर अवतरित होकर मानव को उसके जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराते हैं।
सम्मेलन के दौरान सतपाल महाराज ने ग्राम पंचायतों को और अधिक सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने ब्लॉक प्रमुख एवं जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा कराए जाने की पहल का उल्लेख करते हुए पारदर्शिता और भ्रष्टाचार उन्मूलन की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम के अंत में बिन्दुखत्ता के ग्रामीणों ने क्षेत्र को राजस्व गांव घोषित किए जाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
सम्मेलन में विधायक डॉ. मोहन बिष्ट, पूर्व मंत्री हरिश्चंद्र दुर्गापाल, पूर्व विधायक नवीन दुमका, सुयश रावत, संतोष दुबे, ओमप्रकाश, देव सिंह राणा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
महाशिवरात्रि के इस विराट आयोजन ने न केवल आध्यात्मिक चेतना को प्रबल किया, बल्कि सामाजिक एकता और विकास के संकल्प को भी नई ऊर्जा प्रदान की।
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