शैल शक्ति : विशेष रिपोर्ट ​: हाट कालिका के आंचल में गूंजी लोक संस्कृति: बिन्दुखत्ता में उत्तरायणी कौतिक ने बिखेरे अद्भुत रंग

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​बिन्दुखत्ता:
बिन्दुखत्ता स्थित हाट कालिका इण्टर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित दो दिवसीय ‘जय माँ हाट कालिका उत्तरायणी कौतिक-2026’ ( तृतीय वर्ष) ने क्षेत्र में सांस्कृतिक आभा के अद्भुत रंग बिखेर दिए। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर 14 और 15 जनवरी को आयोजित इस भव्य मेले में ‘हाट कालिका के आंचल में गूंजी संस्कृति की गूंज’ स्पष्ट सुनाई दी, जिसने पूरे माहौल को उल्लास और देवभूमि की समृद्ध परंपराओं से सराबोर कर दिया।

​झोड़ा-चांचरी पर थिरका जनसैलाब

मेले का मुख्य आकर्षण कुमाऊँ की पारंपरिक लोक विधाएं रहीं, जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष रूप से ‘झोड़ा’ और ‘चांचरी’ की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया।
​झोड़ा: यह कुमाऊँ का एक प्रमुख सामूहिक नृत्य गीत है। इसमें मेलार्थियों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर या कंधे पर हाथ रखकर एक विशाल गोलाकार श्रृंखला बनाई और हुड़के की थाप पर लयबद्ध तरीके से नृत्य किया। यह नृत्य न केवल मनोरंजन, बल्कि सामाजिक एकता और सामंजस्य का अद्भुत प्रतीक बनकर उभरा।

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​चांचरी: देवी-देवताओं की स्तुति, पौराणिक

कथाओं और प्रेम प्रसंगों पर आधारित ‘चांचरी’ के गीतों ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर गाई जाने वाली चांचरी ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुति पर उपस्थित जनसमूह स्वयं को थिरकने से नहीं रोक पाया।

इस भव्य आयोजन की सफलता पर कौतिक समिति के शीर्ष पदाधिकारियों ने हर्ष व्यक्त किया और अपनी संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
​अध्यक्ष बलवन्त सम्मल का कहना था: “उत्तरायणी कौतिक केवल एक मेला नहीं, बल्कि यह हमारी देवभूमि की महान सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का जीवंत उत्सव है। माँ हाट कालिका की कृपा से यह आयोजन सफल रहा। हमारा उद्देश्य इन लोक विधाओं को संरक्षित करना और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों पर गर्व करना सिखाना है।”

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वही ​प्रबंधक कमल पाण्डे ने कहा

“बिन्दुखत्ता जैसे क्षेत्र में इतने भव्य पैमाने पर सांस्कृतिक महाकुंभ का आयोजन समाज की एकजुटता का प्रमाण है। क्षेत्रवासियों और सभी सहयोगियों के अपार समर्थन ने इस कौतिक को ऐतिहासिक बना दिया है। हम भविष्य में इसे और भव्य रूप देने के लिए संकल्पित हैं।”

​इनकी रही सक्रिय भूमिका

इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में पूरी कार्यकारिणी समिति का अथक परिश्रम रहा। सभी पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
​मुख्य कार्यकारिणी:
​अध्यक्ष: बलवन्त सम्मल
​प्रबंधक: कमल पाण्डे
​कार्यकारी अध्यक्ष: हरीश देवराड़ी
​मेलाधिकारी: गोविन्द सामन्त
​सचिव: देवकीनन्दन भट्ट
​कोषाध्यक्ष: गोपाल परिहार
​वरिष्ठ उपाध्यक्ष: संतोष सनवाल
​मन्दिर पुजारी: पंकज खोलिया
​उप प्रबंधक: महेन्द्र विष्ट
​उपाध्यक्ष: नारायण शर्मा
​संयोजक: भुवन पाण्डे
​उपाध्यक्ष: सुरेश विष्ट

​सहयोग एवं व्यवस्था समिति:

आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने में संचालक मोहन खोलिया, कार्यालय प्रभारी हरेन्द्र बिष्ट, उप कोषाध्यक्ष मनोज सम्मल, मीडिया प्रभारी चन्दन शर्मा व विशन बोरा, व्यवस्थापक पूरन परिहार व कमल शर्मा, प्रचार मंत्री वीरेन्द्र बोरा, मीडिया प्रभारी भास्कर खोलिया, सुरक्षा प्रभारी नारायण कैड़ा अनुशासन प्रभारी विमल मेहरा, सलाहकार हरेन्द्र रौतेला, प्रचार मन्त्री नवीन जोशी, कार्यालय प्रभारी मोहन शर्मा उप सचिव पंकज कोरंगा
​इसके अतिरिक्त महिला प्रभारी सरिता बोरा, युवा प्रभारी पंकज बिष्ट, अनुशासन प्रभारी ललित जीना, सांस्कृतिक प्रभारी खीम सिंह कार्की, अनुशासन प्रभारी कमल सम्मल, सांस्कृतिक प्रभारी मुन्ना दसौती ट, सोशल मीडिया प्रभारी जीवन पन्त, सलाहकार योगेन्द्र भट्ट, सोशल मीडिया प्रभारी नवीन कापड़ी, सोशल मीडिया प्रभारी पूरन बिष्ट, सलाहकार जगदीश पाठक, लेखा प्रभारी भुवन जोशी, ऑडिटर खीमानन्द भट्ट, सांस्कृतिक प्रभारी जीवन पाण्डे और सुरक्षा अधिकारी सुरेश बसेड़ा का योगदान सराहनीय रहा।
​दो दिनों तक चले इस कौतिक ने बिन्दुखत्ता को लोकरंगों में रंग दिया और लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी।