हल्दूचौड़
डूगरपूर हल्दूचौड़ के पौराणिक कालिका मन्दिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पाँचवें दिन कथा व्यास भागवताचार्य नमन कृष्ण महाराज जी से विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने श्रीमद् भागवत के आध्यात्मिक महत्व, भक्ति मार्ग की महिमा तथा वर्तमान समय में कथा श्रवण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर महाराज जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। उन्होंने बताया कि भागवत कथा मनुष्य को मोह, लोभ और अहंकार से मुक्त कर भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना उत्पन्न करती है।
महाराज जी ने कहा कि कलियुग में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति ही सबसे सरल और प्रभावी साधना है। भागवत कथा का श्रवण करने से मन शुद्ध होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे कथा को केवल श्रवण तक सीमित न रखें, बल्कि उसके संदेशों को अपने जीवन में भी अपनाएं।
युवा पीढ़ी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने की आवश्यकता है, और श्रीमद् भागवत कथा उन्हें सही दिशा प्रदान करने का सशक्त माध्यम है।
कथा आयोजन के उद्देश्य पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से क्षेत्र में सुख-शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही उन्होंने क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि और मंगलकामना करते हुए सभी श्रद्धालुओं को नियमित रूप से कथा श्रवण और सत्संग से जुड़े रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा का रसपान कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है।
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