विशेष साक्षात्कार | ग्रामीण नवाचार के प्रतीक महावीर प्रसाद भट्ट से बातचीत

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देवप्रयाग/टिहरी गढ़वाल
ग्राम गौरव सम्मान–2025 से सम्मानित महावीर प्रसाद भट्ट से हमारी विशेष बातचीत, जिसमें उन्होंने अपने जीवन, संघर्ष, नवाचार और “आत्मनिर्भर पहाड़” के स्वप्न को विस्तार से साझा किया—
प्रश्न 1: सबसे पहले “ग्राम गौरव सम्मान–2025” के लिए बधाई। यह सम्मान आपके लिए क्या मायने रखता है?
महावीर प्रसाद भट्ट:
यह सम्मान मेरे लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं बड़ा है। यह मेरे गांव, मेरी मिट्टी और उस पहाड़ी संस्कृति का सम्मान है जिसने मुझे पहचान दी। जब मंच से मेरा नाम पुकारा गया, तो मुझे लगा जैसे भदासु पुजारगांव की हर पगडंडी मुझे आशीर्वाद दे रही हो।
प्रश्न 2: आपने कॉर्पोरेट जगत में ऊँचे पदों पर काम किया, फिर गांव और कृषि की ओर लौटने का विचार कैसे आया?
महावीर प्रसाद भट्ट:
मैंने दुनिया देखी, बड़े-बड़े ब्रांड्स के साथ काम किया, लेकिन मन में हमेशा एक खालीपन था। जब भी गांव जाता, तो पलायन और खेतों की वीरानी मुझे भीतर तक झकझोर देती। तभी तय किया कि अगर अनुभव और संसाधन हैं, तो उन्हें पहाड़ के लिए लगाना ही सच्ची सफलता होगी।
प्रश्न 3: “सयुश न्यूट्रास्यूटिकल्स” की स्थापना के पीछे आपकी सोच क्या थी?
महावीर प्रसाद भट्ट:
पहाड़ के फल बेहतरीन हैं, लेकिन संरक्षण और बाज़ार के अभाव में किसान को पूरा मूल्य नहीं मिलता। “सयुश” के माध्यम से मेरा उद्देश्य स्थानीय फलों का वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर किसानों और युवाओं को रोजगार देना था। आज 30 से अधिक स्थानीय लोग इससे जुड़े हैं—यही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।
प्रश्न 4: आपने फल संरक्षण और कृषि नवाचार को ही क्यों चुना?
महावीर प्रसाद भट्ट:
क्योंकि यही पहाड़ की असली ताकत है। बांस आधारित खेती, वैज्ञानिक कृषि तकनीक और फल प्रसंस्करण—ये तीनों मिलकर पहाड़ को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। मेरा मानना है कि पहाड़ को उद्योग चाहिए, लेकिन उसकी प्रकृति और संस्कृति के अनुरूप।
प्रश्न 5: प्रशासन और सरकार से आपको किस प्रकार का सहयोग मिला?
महावीर प्रसाद भट्ट:
टिहरी गढ़वाल के CDO डॉ. अभिषेक त्रिपाठी का सहयोग उल्लेखनीय रहा। उनका गांव आकर कृषि मॉडल पर कार्यशाला करना इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासन और समाज साथ आएं, तो बदलाव संभव है।
प्रश्न 6: आपने अपने गांव को गोद लेने का संकल्प लिया है, इसके पीछे क्या भावना है?
महावीर प्रसाद भट्ट:
गांव सिर्फ जन्मस्थान नहीं, संस्कारों की पाठशाला होता है। पुराने घर, काष्ठकला, परंपराएं—ये हमारी पहचान हैं। मेरा प्रयास है कि गांव को ऐसा मॉडल बनाया जाए, जहां बुजुर्ग सुरक्षित हों, युवा स्वावलंबी हों और संस्कृति जीवित रहे।
प्रश्न 7: आज के पहाड़ी युवाओं के लिए आपका संदेश?
महावीर प्रसाद भट्ट:
मैं युवाओं से कहना चाहता हूं—पहाड़ छोड़ना मजबूरी नहीं, विकल्प होना चाहिए। अगर ज्ञान, तकनीक और आत्मविश्वास के साथ लौटेंगे, तो पहाड़ आपको पहचान और सम्मान दोनों देगा।
“पहाड़ का भविष्य पलायन नहीं, पुनर्जागरण है।”
प्रश्न 8: आगे की आपकी सबसे बड़ी योजना क्या है?
महावीर प्रसाद भट्ट:
मेरा सपना है कि टिहरी गढ़वाल और आसपास के गांव आत्मनिर्भर कृषि–उद्योग मॉडल बनें, जहां किसान उत्पादक भी हो और उद्यमी भी। अगर यह हो गया, तो मेरी जीवन यात्रा सार्थक हो जाएगी।
समापन
महावीर प्रसाद भट्ट का यह साक्षात्कार केवल शब्द नहीं, बल्कि पहाड़ के भविष्य का घोष है।
उन्होंने सिद्ध कर दिया कि—
सफलता पाने के लिए पहाड़ छोड़ना जरूरी नहीं,
और अगर छोड़ना पड़ा भी,
तो सफलता पाकर लौट आना ही सच्ची साधना है।