विशेष साक्षात्कार :आध्यात्मिक गुरु एवं कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज से विशेष बातचीत,“महाशिवरात्रि में आध्यात्म और पर्यटन का संगम: सतपाल महाराज का उत्तराखंड के गुमनाम तीर्थों को नई पहचान देने का संदेश”

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आज महाशिवरात्री के पावन अवसर पर माँ अवंतिका मंदिर लालकुआँ व बिन्दुखत्ता स्थित हंस प्रेम योग आश्रम का वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत था। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित इस विशेष मुलाकात में उत्तराखण्ड सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज जी ने धर्म, संस्कृति, पर्यटन और प्रदेश के गुमनाम तीर्थों के उत्थान पर विस्तार से विचार रखे। प्रस्तुत है इस अवसर पर हुई विस्तृत बातचीत—

प्रश्न 1: महाराज जी, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को आपका संदेश?

उत्तर: महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर है। भगवान शिव त्याग, तपस्या, करुणा और समता के प्रतीक हैं। मैं समस्त प्रदेशवासियों एवं देशवासियों को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। यह पर्व हमें अहंकार त्यागकर शिवत्व को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।

प्रश्न 2: आपने अपने संबोधन में भगवान शिव के पावन चरित्रों का उल्लेख किया। आज के समाज के लिए उनसे क्या सीख मिलती है?

उत्तर:भगवान शिव का चरित्र अत्यंत व्यापक है। वे भोलेनाथ हैं सहज, सरल और करुणामय। उन्होंने समुद्र मंथन में विषपान कर लोककल्याण का संदेश दिया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज के हित में त्याग और संयम आवश्यक है। शिव परिवार समरसता का प्रतीक है जहाँ विभिन्न स्वभाव और प्रकृति के प्राणी भी एक साथ रहते हैं।

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प्रश्न 3: आपने अवंतिका मंदिर, लालकुआँ के सौंदर्यकरण का आश्वासन दिया है। इस पर क्या योजना है?

उत्तर: लालकुआँ का अवंतिका मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। हमारी सरकार का प्रयास है कि ऐसे प्राचीन एवं पौराणिक महत्व वाले मंदिरों का संरक्षण एवं सौंदर्यकरण हो। विधायक जी के माध्यम से बाउड्री निर्माण की मांग की गयी है अवंतिका मंदिर परिसर में आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा

प्रश्न 4: पहाड़ के गुमनाम तीर्थों को प्रकाश में लाने की बात आपने कही। इस दिशा में क्या पहल हो रही है?

उत्तर:उत्तराखण्ड देवभूमि है। यहाँ अनेक ऐसे तीर्थ हैं जिनका उल्लेख पुराणों में मिलता है, परंतु वे आज भी उपेक्षित हैं। हमारी सरकार इन गुमनाम तीर्थों का सर्वेक्षण कर रही है। सड़क, आवास और प्रचार-प्रसार के माध्यम से उन्हें धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर लाया जाएगा। इससे स्थानीय रोजगार भी बढ़ेगा और संस्कृति का संरक्षण भी होगा।

प्रश्न 5: ‘मानस खण्ड मंदिर माला’ योजना के बारे में विस्तार से बताइए।

उत्तर:‘मानस खण्ड मंदिर माला’ योजना के अंतर्गत कुमाऊँ क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों को एक धार्मिक परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें मंदिरों का जीर्णोद्धार, सौंदर्यकरण, डिजिटल सूचना केंद्र, मार्गदर्शन संकेतक और तीर्थ यात्रियों के लिए सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को संगठित और व्यवस्थित रूप देना है।

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प्रश्न 6: कुमाऊँ और गढ़वाल के प्रमुख तीर्थों की विशेषता क्या है?

उत्तर: कुमाऊँ व गढ़वाल क्षेत्र में केदारनाथ बद्रीनाथ महासू देवता गोलज्यू पाताल भुवनेश्वर जैसे विश्वविख्यात अनेको धाम हैं। ये केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र हैं।

प्रश्न 7: आध्यात्म और पर्यटन के समन्वय को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर:आध्यात्म और पर्यटन परस्पर पूरक हैं। जब कोई व्यक्ति तीर्थ यात्रा पर जाता है तो वह केवल दर्शन नहीं करता, बल्कि अपनी आत्मा से जुड़ता है। यदि व्यवस्थाएँ सुदृढ़ हों, तो तीर्थाटन प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाता है। हमारा लक्ष्य है‘आस्था के साथ विकास’।

प्रश्न 8: युवाओं के लिए आपका संदेश?

उत्तर:युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ना होगा। आधुनिकता को अपनाएँ, लेकिन संस्कृति को न भूलें। योग, ध्यान और अध्यात्म जीवन में संतुलन लाते हैं। उत्तराखण्ड की संस्कृति और परंपरा पर हमें गर्व होना चाहिए।

प्रश्न 9: उत्तराखण्ड में पर्यटन और तीर्थाटन की संभावनाओं को आप किस रूप में देखते हैं?
उत्तर:देवभूमि उत्तराखण्ड प्राकृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विश्व में विशिष्ट स्थान रखती है। यहाँ हिमालय की गोद, कल-कल बहती नदियाँ, रमणीक वादियाँ और प्राचीन तीर्थ स्थल मिलकर अद्वितीय अनुभव प्रदान करते हैं। हमारी सरकार पर्यटन और तीर्थाटन को संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी सशक्त हो।

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प्रश्न 10 : गुमनामी के साये में पड़े देवालयों के लिए क्या योजना है?

उत्तर:राज्य के अनेक प्राचीन मंदिर और धरोहरें को चिन्हित कर सूचीबद्ध किया जा रहा है। जीर्णोद्धार, आधारभूत संरचना, मार्ग-सुविधा और प्रचार-प्रसार के माध्यम से उन्हें पर्यटन मानचित्र पर स्थान दिया जाएगा। पांडवकालीन स्थलों जैसे को भी विशेष रूप से संवारा जाएगा।

इस विशेष बातचीत में सतपाल महाराज जी ने स्पष्ट किया कि उत्तराखण्ड के आध्यात्मिक वैभव को वैश्विक पहचान दिलाना उनका लक्ष्य है। अवंतिका मंदिर के सौंदर्यकरण से लेकर गुमनाम तीर्थों को पहचान दिलाने तक सरकार आस्था और विकास के समन्वय की दिशा में प्रतिबद्ध है।
महाशिवरात्रि के पावन संदेश के साथ यह संवाद प्रदेश की धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर एक सकारात्मक संकेत देता है।

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