विशेष साक्षात्कार: ‘ग्रीन सेंचुरी, क्लीन सेंचुरी’ के संकल्प के साथ सीईओ अजय कुमार गुप्ता से खास बातचीत

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विशेष साक्षात्कार: ‘ग्रीन सेंचुरी, क्लीन सेंचुरी’ के संकल्प के साथ सीईओ अजय कुमार गुप्ता से खास बातचीत
​सेंचुरी मिल द्वारा लालकुआं क्षेत्र में आयोजित ‘वॉकथॉन’ (पैदल मार्च) ने स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक नई जागरूकता पैदा की है। इस अत्यंत प्रासंगिक और जनहित से जुड़े विषय पर सेंचुरी मिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री अजय कुमार गुप्ता से एक विस्तृत बातचीत की गई। प्रस्तुत हैं उस साक्षात्कार के प्रमुख अंश:
​प्रश्न: सेंचुरी मिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में, आपने इस ‘पैदल मार्च’ में पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के दोहरे संदेश को एक साथ कैसे देखा, और मिल इस सामाजिक पहल से खुद को किस प्रकार जोड़ती है?
​उत्तर (श्री अजय कुमार गुप्ता): पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि हमारा पर्यावरण अस्वस्थ है, तो हम कभी स्वस्थ नहीं रह सकते। इस ‘पैदल मार्च’ या वॉकथॉन के माध्यम से हमने इन दोनों महत्वपूर्ण पहलुओं को एक ही सूत्र में पिरोने का प्रयास किया है। सेंचुरी मिल हमेशा से ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ यानी सतत विकास में विश्वास रखती है। जब हम पैदल चलते हैं, तो न केवल कार्बन फुटप्रिंट कम करके प्रकृति को बचाते हैं, बल्कि अपनी शारीरिक क्षमता को भी मजबूत करते हैं। यह पहल हमारी उसी सोच का जमीनी क्रियान्वयन है।
​प्रश्न: इस ‘पैदल मार्च’ का मुख्य उद्देश्य आमजन तक स्वास्थ्य और फिटनेस का संदेश पहुँचाना है। सेंचुरी मिल इस तरह की स्वास्थ्य-जागरूकता पहलों को किस नजरिए से देखती है और इसका समर्थन कैसे करती है?
​उत्तर: हम मानते हैं कि एक स्वस्थ समाज ही एक मजबूत राष्ट्र की नींव रख सकता है। सेंचुरी मिल इन पहलों को केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक ‘सामाजिक आंदोलन’ के रूप में देखती है। हम अपने संसाधनों, जनशक्ति और प्रबंधन के सक्रिय नेतृत्व के माध्यम से ऐसे अभियानों का पूरा समर्थन करते हैं, ताकि आम नागरिक अपने स्वास्थ्य के प्रति गंभीर हो सकें।
​प्रश्न: आज के डिजिटल युग और भागदौड़ भरी जीवनशैली में शारीरिक निष्क्रियता एक गंभीर समस्या बन गई है। आपके अनुसार, नियमित रूप से पैदल चलने की आदत शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को कैसे बेहतर बना सकती है?
​उत्तर: यह बिल्कुल सच है कि तकनीक ने हमारा काम तो आसान किया है, लेकिन हमें शारीरिक रूप से निष्क्रिय भी कर दिया है। नियमित रूप से पैदल चलना सबसे सरल और प्रभावी व्यायाम है। यह न केवल हृदय रोगों के खतरे को कम करता है और रक्त संचार सुधारता है, बल्कि खुली हवा में चलने से मानसिक तनाव भी दूर होता है। प्रकृति के बीच बिताया गया कुछ समय हमारे मन-मस्तिष्क को नई ऊर्जा और एकाग्रता प्रदान करता है।
​प्रश्न: इस मार्च के माध्यम से आप लालकुआं और आसपास के क्षेत्र के युवाओं को फिटनेस को गंभीरता से लेने और एक स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के लिए क्या विशेष संदेश देना चाहेंगे?
​उत्तर: लालकुआं क्षेत्र के युवाओं में अपार ऊर्जा और क्षमता है। मेरा उन्हें यही संदेश है कि मोबाइल स्क्रीन और डिजिटल दुनिया से बाहर निकलकर कुछ समय मैदानों और प्रकृति के बीच बिताएं। फिटनेस को अपनी दिनचर्या का एक अनिवार्य हिस्सा बनाएं, क्योंकि एक स्वस्थ शरीर में ही एक सशक्त और रचनात्मक मस्तिष्क निवास कर सकता है। जवानी में बनाई गई अच्छी आदतें जीवन भर साथ निभाती हैं।
​प्रश्न: आम जनता के साथ-साथ, क्या सेंचुरी मिल प्रबंधन अपने कर्मचारियों के बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए परिसर के भीतर भी इस तरह की शारीरिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का कोई प्रयास कर रहा है?
​उत्तर: बिल्कुल। हमारे कर्मचारी ही हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। हमने सी.पी.पी. स्टाफ कॉलोनी और मिल परिसर के भीतर खेलकूद के मैदान और वॉकिंग ट्रैक विकसित किए हैं। इसके अलावा, हम समय-समय पर खेल प्रतियोगिताओं और योग शिविरों का आयोजन करते रहते हैं, ताकि कर्मचारी अपनी शिफ्ट के बाद तनावमुक्त हो सकें और शारीरिक रूप से फिट रहें।

​प्रश्न: इस प्रकार के स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों का प्रभाव केवल एक दिन तक सीमित न रहे, इसके लिए स्थानीय प्रशासन, कॉर्पोरेट संस्थाओं और आम जनता के बीच कैसे एक स्थायी समन्वय स्थापित किया जा सकता है?
​उत्तर: किसी भी अभियान की स्थायी सफलता के लिए ‘सामूहिक भागीदारी’ सबसे जरूरी है। कॉर्पोरेट संस्थाएं ऐसे कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर सकती हैं और संसाधन दे सकती हैं, स्थानीय प्रशासन आधारभूत ढांचा और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है, लेकिन इसे एक स्थायी आदत में बदलना आम जनता के हाथ में है। जब ये तीनों एक साथ मिलकर निरंतर संवाद और प्रयास करेंगे, तभी यह एक दिन का आयोजन न रहकर जीवनशैली बन पाएगा।
​प्रश्न: अंत में,  पाठकों को आप अपनी तरफ से ऐसा कौन सा एक आसान और व्यावहारिक सुझाव देंगे, जिसे वे खुद को बीमारियों से दूर रखने के लिए आज से ही अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकें?
​उत्तर: ‘ प्रबुद्ध पाठकों को मेरा एक बहुत ही सीधा और सरल सुझाव है— रोज़ाना कम से कम 30 से 40 मिनट पैदल चलने का संकल्प लें। आस-पास के छोटे कामों के लिए दोपहिया या चौपहिया वाहनों का इस्तेमाल बंद कर दें और पैदल चलें। यह एक ऐसा निवेश है जिसमें कोई पैसा खर्च नहीं होता, लेकिन इसका रिटर्न आपके बेहतरीन स्वास्थ्य और दीर्घायु के रूप में जीवन भर मिलता है।

इस अवसर पर मिल के सीओओ श्री प्रणव शर्मा सीएफओ श्री महेन्द्र हरित उपाध्यक्ष श्री नरेश चन्द्रा एच आर विभाग के महाप्रबंधक श्री एस० के० बाजपेयी सहित अनेकों मौजूद रहे

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