निष्काम श्रीराम भक्ति का अनुपम उदाहरण बने राजेन्द्र अग्निहोत्री, कथावाचक डॉ० पंकज मिश्रा मयंक ने की मुक्तकंठ से सराहना

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लालकुआँ।
श्रीराम भक्ति जब निष्काम भाव से की जाए तो वह स्वयं एक साधना बन जाती है ऐसा ही अनुपम उदाहरण लालकुआँ के श्रीराम भक्त राजेन्द्र अग्निहोत्री ने प्रस्तुत किया है। उनकी इसी निस्वार्थ और समर्पित भक्ति की कथा-वाचन के दौरान सुप्रसिद्ध कथावाचक डॉ० पंकज मिश्रा मयंक ने खुले मन से सराहना करते हुए उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
डॉ० पंकज मिश्रा मयंक ने कहा कि श्रीराम कथा आयोजन से जुड़े सभी सेवाभावी जनों का कार्य अत्यंत सराहनीय, अनुकरणीय और समर्पित है, किंतु राजेन्द्र अग्निहोत्री का निष्काम भाव से किया गया समर्पण वास्तव में अद्भुत और प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि बिना किसी अपेक्षा के, केवल प्रभु श्रीराम की सेवा और भक्ति के भाव से किया गया कार्य ही सच्ची साधना कहलाता है।
कथावाचक ने यह भी कहा कि ऐसे भक्त समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श स्थापित करते हैं। श्रीराम कथा के आयोजन में अग्निहोत्री जी की सक्रिय भूमिका, सेवा-भाव और श्रद्धा को उन्होंने भक्तिभाव की सजीव मिसाल बताया।
इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी डॉ० पंकज मिश्रा मयंक के विचारों का करतल ध्वनि से स्वागत किया। वातावरण श्रीराम नाम की गूंज और भक्तिरस से ओतप्रोत हो उठा।