महाबिन्देश्वर मंदिर में देवी भागवत की महिमा का भावपूर्ण वर्णन, कथावाचक मनोज कृष्ण जोशी ने किया शक्ति दर्शन का उद्घोष

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बिन्दुखत्ता/इन्द्रानगर द्वितीय स्थित महाबिन्देश्वर मंदिर में श्रीमद् देवी भागवत कथा के शुभारम्भ से पूर्व आयोजित विशेष वार्ता में प्रसिद्ध कथावाचक मनोज कृष्ण जोशी ने देवी भागवत की दिव्य महिमा पर भावपूर्ण उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि देवी भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक आध्यात्मिक दृष्टि है, जो मनुष्य को आत्मबल, करुणा, धर्म और सत्य के मार्ग पर अग्रसर करती है।
कथावाचक श्री जोशी ने देवी को ब्रह्मांड की मूल चेतना और सृष्टि की जननी बताते हुए कहा कि माँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के स्वरूपों में शक्ति, समृद्धि और ज्ञान का दिव्य संतुलन मानव जीवन को पूर्णता की ओर ले जाता है। उन्होंने देवी लीलाओं को जीवन संघर्षों का प्रतीक बताते हुए कहा कि महिषासुर, शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे असुर हमारे भीतर के अहंकार और अज्ञान के रूप हैं, जिनका संहार कर देवी आत्मविजय का मार्ग दिखाती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि देवी भागवत का पाठ और श्रवण मन को शांति, आत्मा को बल और जीवन को दिशा प्रदान करता है। आज के तनावपूर्ण और भौतिकतावादी युग में यह ग्रंथ नारी शक्ति के सम्मान, करुणा, सेवा और सहअस्तित्व जैसे मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना करता है।
वार्ता के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति भाव से उनके विचारों को आत्मसात किया। इस अवसर पर मंदिर परिसर माँ भगवती की जयकारों से गूंज उठा और भक्तिमय वातावरण में श्रीमद् देवी भागवत कथा का शुभारम्भ हुआ। 

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