लालकुआँ के पावन धाम से उठी समाज कल्याण की एक ऐसी अलख, जिसने हर दिल में जगाई उम्मीद: जानिए कौन हैं अध्यात्म और सेवा की राह पर इतिहास रचने वाली श्रीमती लता बोरा

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लालकुआँ। उत्तराखंड की पावन भूमि पर स्थित माँ अवंतिका शक्ति कुंज शक्तिपीठ मंदिर आज एक अत्यंत विशेष और ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। इस पावन धाम में आस्था और समाज सेवा का एक ऐसा अदभुत संगम देखने को मिला, जिसने वहाँ उपस्थित प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय को गहराई से छू लिया। पुनर्नवा महिला समिति, हल्द्वानी की कर्मठ अध्यक्ष एवं महिला रामलीला कमेटी की मार्गदर्शक श्रीमती लता बोरा जी ने समिति की मीडिया प्रभारी श्रीमती कल्पना रावत जी तथा आयुष्मान बोरा जी के साथ माँ अवंतिका के दरबार में शीश नवाया। उन्होंने जगत जननी के पावन दर्शन कर जनकल्याण की मंगल कामना के साथ दिव्य आशीर्वाद प्राप्त किया। इस गरिमामयी अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री लक्ष्मण खाती और मुख्य पुजारी पंडित चंद्रशेखर जोशी जी ने सनातन परंपरा के अनुरूप सभी अतिथियों का अंगवस्त्र तथा स्मृति-चिन्ह भेंट कर अत्यंत आत्मीय स्वागत किया।
लेकिन यह भेंट केवल एक सामान्य शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि इसके पीछे छिपी थी उत्तराखंड के समाज को एक नई दिशा देने वाली उस महान हस्ती की कहानी, जिन्होंने निस्वार्थ सेवा को ही अपने जीवन का एकमात्र ध्येय बना लिया है। हल्द्वानी (नैनीताल) की रहने वाली श्रीमती लता बोरा आज समाज में मानवीय गुणों और समर्पण की एक ऐसी जीवंत मिसाल बन चुकी हैं, जिनका नाम सुनते ही असहाय परिवारों के चेहरों पर मुस्कान तैर जाती है। हाल ही में बीती 16 मई 2026 को उनके इसी अनूठे और प्रेरणादायी योगदान का सम्मान करते हुए मुक्त विश्वविद्यालय पूर्व छात्र समिति, हल्द्वानी द्वारा उन्हें अत्यंत प्रतिष्ठित ‘विशिष्ट पुरा छात्र सम्मान 2026’ से नवाजा गया, जो उनके बढ़ते सामाजिक कद और जन-आस्था की गवाही देता है।
शिक्षा को समाज सेवा का वास्तविक हथियार बनाने वाली श्रीमती लता बोरा, जो कि श्री सी.एस. बोरा की धर्मपत्नी हैं, ने समाजशास्त्र में एम.ए. और ‘मास्टर ऑफ सोशल वर्क’ (एम.एस.डब्ल्यू.) जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने अपनी इस उच्च शैक्षणिक पृष्ठभूमि को केवल किताबी ज्ञान की चहारदीवारी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने सामाजिक उत्तरदायित्व को समझते हुए इसे जमीनी धरातल पर उतारा। इसी सेवा भाव को एक मजबूत और संस्थागत रूप देने के लिए उन्होंने 21 दिसंबर 2006 को ‘पुनर्नवा महिला समिति’ की स्थापना की थी। शुरुआत में केवल 15 सक्रिय सदस्यों के साथ शुरू हुई यह संस्था आज उनके कुशल नेतृत्व में पूरे उत्तराखंड में जन-कल्याणकारी कार्यों का एक अटूट पर्याय बन चुकी है।
इस समिति के माध्यम से श्रीमती लता बोरा ने जमीनी स्तर पर सेवा के ऐसे प्रतिमान स्थापित किए हैं जो समाज के लिए एक महान नजीर बन चुके हैं। वर्ष 2009 से लेकर अब तक इस समिति द्वारा कुल 435 निर्धन, असहाय और जरूरतमंद कन्याओं का सामूहिक विवाह अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा चुका है। यह उन गरीब परिवारों के लिए एक बहुत बड़ा संबल साबित हुआ है, जो आर्थिक तंगहाली के कारण अपनी बेटियों की शादी के लिए हमेशा चिंतित रहते थे। इसके अतिरिक्त, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने न केवल मेधावी और जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा का संपूर्ण खर्च वहन किया, बल्कि बड़ीपुरा प्राइमरी स्कूल को 3 वर्षों के लिए गोद लेकर उसके कायाकल्प और संपूर्ण व्यवस्था का पूरा खर्च उठाया। ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों के लिए नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर लगाना हमेशा से उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।
सामाजिक चेतना के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के क्षेत्र में भी श्रीमती लता बोरा ने नए आयाम स्थापित किए हैं। समाज में महिलाओं की सशक्त भागीदारी और एक नई सांस्कृतिक चेतना जगाने के उद्देश्य से वर्ष 2023 से उनकी समिति द्वारा एक अत्यंत अनूठी और भव्य ‘महिला रामलीला’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी चारों ओर जमकर सराहना हो रही है। उनकी संवेदनशीलता और करुणा की भावना यहीं समाप्त नहीं होती, बल्कि कुष्ठाश्रम और नारी निकेतन जैसी जगहों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जहाँ उनकी समिति द्वारा नियमित रूप से जरूरतमंदों को राशन और वस्त्र वितरित किए जाते हैं। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के लिए सघन पौधारोपण अभियान चलाना और समाज के प्रति समर्पित पुरुषों का सम्मान समारोह आयोजित करना भी उनके बहुआयामी कार्यों का मुख्य हिस्सा है।
बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी श्रीमती लता बोरा न केवल पुनर्नवा महिला समिति की संस्थापक अध्यक्ष हैं, बल्कि वे क्षत्रिय महासभा में कोषाध्यक्ष, जिला नैनीताल ह्यूमन राइट्स एंड एंटी करप्शन संगठन में उपाध्यक्ष और ‘ऑल इंडिया वुमन कॉन्फ्रेंस’ की एक बेहद सक्रिय सदस्य के रूप में भी अपनी अमूल्य सेवाएं दे रही हैं। विशेष रूप से बालिका एवं महिला कल्याण के लिए उनके द्वारा चलाई जा रही ‘नन्हीं चिरैया’ मुहिम आज समाज की कुरीतियों के उन्मूलन और असहाय लोगों की मदद के लिए एक वरदान साबित हो रही है। उनके इसी अद्भुत नेतृत्व क्षमता और अडिग सेवा-भाव ने मुक्त विश्वविद्यालय और पूरे समाज को गौरवान्वित किया है।
माँ अवंतिका के पावन धाम में दर्शन करने के उपरांत, इसी अटूट सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए श्रीमती लता बोरा ने मंदिर परिसर में एक विशाल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की पवित्र इच्छा व्यक्त की। उनके इस परोपकारी प्रस्ताव का मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री लक्ष्मण खाती ने सहर्ष स्वागत किया। उन्होंने गर्व से कहा कि मंदिर समिति भी समाज सेवा के कार्यों के लिए सदैव पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि भविष्य में निर्धन एवं असहाय कन्याओं के सामूहिक विवाह जैसे अत्यंत पुण्य कार्यों सहित विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के भव्य आयोजन में मंदिर समिति पुनर्नवा समिति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करने के लिए पूरी तरह तत्पर रहेगी। आज माँ अवंतिका का यह पावन धाम केवल एक धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि समाज सेवा और मानव कल्याण के महान कार्यों का एक सशक्त और जीवंत माध्यम बनकर उभर रहा है, जो आने वाले समय में संपूर्ण क्षेत्र के लिए एक नई सुबह का संदेश लेकर आएगा।