सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम: मूंज घास से संवरेगा चम्पावत की महिलाओं का भविष्य, नाबार्ड की पहल से बनेंगी आत्मनिर्भर

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बमनपुरी (बनबसा), चम्पावत
उत्तराखंड के चम्पावत जिले में महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय पहल की गई है। *राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड)*के सहयोग और ‘प्रगतिशील संस्था’* के कुशल आयोजन में, बनबसा के ग्राम बमनपुरी की महिलाओं ने आर्थिक आज़ादी की ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं। यहाँ 30 स्थानीय महिलाओं को मूंज घास से निर्मित आकर्षक और फैंसी टोकरियाँ बनाने का 15 दिवसीय गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसका उद्देश्य उन्हें स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।
स्वरोजगार से ही संभव है सच्ची आत्मनिर्भरता
प्रशिक्षण के भव्य समापन समारोह में उपस्थित अधिकारियों ने महिलाओं का उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की:
नाबार्ड की ग्रामीण मार्ट योजना: कार्यक्रम में नाबार्ड की जिला विकास प्रबंधक (DDM) श्रीमती स्वाति कार्की ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वरोजगार ही महिलाओं को सही मायने में स्वावलंबी बना सकता है। उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए आश्वासन दिया कि यदि ये 30 महिलाएँ अपने इस हुनर का बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं, तो नाबार्ड भविष्य में उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों की बिक्री के लिए ‘रूरल मार्ट’ (Rural Mart) की स्थापना भी कर सकता है। उन्होंने ग्रामीण विकास और जनकल्याण में नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
आर्थिक सहयोग के लिए बैंक तत्पर: चम्पावत के लीड बैंक मैनेजर (LDM) श्री अमर सिंह ग्वाल ने महिलाओं को वित्तीय साक्षरता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने प्रोत्साहित किया कि अपने व्यवसाय को एक बड़े मुकाम तक ले जाने के लिए महिलाएँ बैंकों से आसान किस्तों पर ऋण प्राप्त कर सकती हैं। साथ ही, उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार की रोजगारपरक योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया।
नैनीताल बैंक का समर्थन: नैनीताल बैंक के शाखा प्रबंधक श्री दीपक कांडपाल ने भी इस पहल की सराहना की और भरोसा दिलाया कि व्यवसाय विस्तार के लिए बैंक की योजनाएं हमेशा लाभार्थियों के साथ खड़ी हैं।
कौशल विकास और बाज़ार से जुड़ाव
परियोजना का सफल संचालन कर रही ‘प्रगतिशील संस्था’ के निदेशक श्री शशि कुमार सिंह रावत ने प्रशिक्षण की बारीकियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि इन 30 महिलाओं को कुशल मास्टर ट्रेनर श्री परविंदर राना के मार्गदर्शन में फैंसी टोकरियाँ बनाने की बारीकियां सिखाई गईं। सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ महिलाओं को शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। संस्था ने प्रतिबद्धता जताई है कि वह भविष्य में भी इन महिलाओं को सही बाज़ार (मार्केटिंग) उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।
समारोह में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की प्रतिनिधि मुन्नी देवी और ग्राम विकास अधिकारी रश्मि जोशी ने भी अपने विचार साझा करते हुए महिलाओं के इस नए सफर के लिए उन्हें शुभकामनाएँ दीं।
ये महिलाएँ बनीं बदलाव की वाहक
इस 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में जिन 30 उत्साही महिलाओं ने भाग लेकर अपने हुनर को निखारा, उनके नाम इस प्रकार हैं:
 अमृता देवी, लता मंगेश, राजकुमारी, श्यामवती, चांदनी, लाजवंती, आरती देवी, जयंती देवी, राखी, लाली देवी, मनीषा, नीरू देवी, लवी, मुन्नी देवी, सीमंती, दुर्गा देवी, ज्योति देवी, अनीता, रामवती, दर्शना देवी, हेमलता, पायल, कनक, शांति देवी, रंगो देवी, फूल कुमारी, कृष्णा देवी, अनारकली, कविता राना और साधना।

यह प्रशिक्षण मात्र एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इन 30 महिलाओं के लिए एक नए जीवन की शुरुआत है, जहाँ वे अपनी कला और मेहनत के दम पर अपने परिवार और समाज का भविष्य संवारेंगी। मूंज घास से बनी ये टोकरियाँ अब केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि चम्पावत की महिलाओं के स्वाभिमान और स्वावलंबन का प्रतीक बनेंगी।