चिकित्सा के क्षेत्र में मानवीय संवेदनाओं का वह चेहरा, जिसके आँगन पहुँची आदि शक्ति माँ अवंतिका की असीम कृपा

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हल्द्वानी ।चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे पवित्र माध्यम है। जब इस पावन माध्यम को निःस्वार्थ समर्पण, ममतामयी स्पर्श और गहरी संवेदनशीलता का साथ मिलता है, तो वह व्यक्तित्व समाज के लिए एक प्रेरणा पुंज बन जाता है।

हाल ही में एक अत्यंत गरिमामयी और आत्मीय क्षण का साक्षी बना चिकित्सा जगत, जब क्षेत्र की सुप्रसिद्ध एवं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गरिमा खन्ना मेहरोत्रा को पावन पुस्तक ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ सप्रेम भेंट की गई। माँ आदि शक्ति की दिव्य महिमा से ओतप्रोत इस अनुपम कृति का डॉ. गरिमा मेहरोत्रा के हाथों में पहुँचना मानो निष्काम कर्म और अटूट श्रद्धा के एक सुंदर व पावन मिलन का जीवंत प्रतीक बन गया।

डॉ. गरिमा मेहरोत्रा केवल एक कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि मानवीय गुणों की एक ऐसी अद्भुत और अनुपम मिसाल हैं जो हर मरीज के जीवन में आशा की नई किरण बिखेरती हैं।

उनका सहज-सरल स्वभाव, मुखमंडल पर सदैव तैरने वाली सौम्य मुस्कान और मरीजों के प्रति उनकी अगाध सहानुभूति उन्हें चिकित्सा जगत में एक अद्वितीय और वंदनीय स्थान देती है। उनके चिकित्सा कक्ष में कदम रखने वाला हर पीड़ित व्यक्ति उनकी आत्मीयता और संवेदनशीलता से आधा रोग तो वहीं भूल जाता है।

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डॉ गरिमा मेहरोत्रा केवल शारीरिक व्याधियों का उपचार नहीं करतीं, बल्कि एक माँ और बहन की तरह मरीजों को ढांढस बंधाकर उनके चेहरों पर सच्ची और स्थाई मुस्कान वापस लाने का भगीरथ प्रयास करती हैं। मरीजों की देखभाल में उनका हर पल केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि सच्ची करुणा से संचालित होता है।

यदि उनके शानदार पेशेवर सफर और असाधारण शैक्षणिक उपलब्धियों के सुनहरे पन्नों को पलटें, तो स्पष्ट होता है कि उनका यह सफर देश-विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं से प्राप्त ज्ञान और गहन अनुभवों से समृद्ध है।

उन्होंने देश के अत्यंत प्रतिष्ठित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अमृतसर (बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज) से अपनी एमबीबीएस की शिक्षा पूरी की और इसके पश्चात राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, जयपुर से एमएस (स्त्री एवं प्रसूति रोग) की उच्च उपाधि हासिल की। वे उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में स्थाई रूप से पंजीकृत होकर निरंतर अपनी उत्कृष्ट और समर्पित सेवाएं दे रही हैं

चिकित्सा के क्षेत्र में नित नए अनुसंधान करने की उनकी ललक यहीं शांत नहीं हुई, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन से इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसके माध्यम से वे निःसंतानता और बार-बार होने वाले गर्भपात जैसी जटिल समस्याओं से जूझ रहे अनगिनत परिवारों के जीवन में खुशियों का नया सवेरा ला रही हैं।

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इसके साथ ही, डॉ. गरिमा ने देश के सर्वश्रेष्ठ केंद्रों से एडवांस्ड लेप्रोस्कोपी का प्रशिक्षण लिया है और बी.एल. कपूर मेमोरियल हॉस्पिटल, नई दिल्ली में फॉग्सी (FOGSI) के तत्वावधान में आयोजित एडवांस्ड एंडोस्कोपी के गहन प्रशिक्षण में भी अपनी विशेषज्ञता दर्ज कराई है।

उनकी इसी असाधारण प्रतिभा और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी अटूट कटिबद्धता के कारण उन्हें अनेक राष्ट्रीय और प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

गर्भावस्था के दौरान आयोडीन फोर्टिफिकेशन के माध्यम से थायराइड विकारों से निपटने के लिए आयोजित ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ के विशेष और बड़े अभियान में उनकी सराहनीय व सक्रिय भागीदारी रही है, जिसने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दिशा में नए मानक स्थापित किए।

इतना ही नहीं एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र द्वारा संचालित अनोखी क्लब के एक भव्य कार्यक्रम में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में सादर आमंत्रित कर सम्मानित किया जा चुका है ।
यह महिला स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके बढ़ते कदमों की सुंदर तस्दीक करता है।
स्थानीय स्तर पर भी उनके मार्गदर्शक, सहयोगी और ममतामयी रूप को बेहद आदर के साथ सराहा गया है।
हल्द्वानी (नैनीताल) की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था ‘अनमोल संकल्प सिद्धि फाउंडेशन’ ने भी उनके अद्वितीय सहयोग, सानिध्य और कुशल मार्गदर्शन के लिए एक विशेष भव्य आभार पत्र भेंट कर उनका सहृदय सम्मान किया है।

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संस्था की सचिव श्रीमती सुमन पाठक, अध्यक्षा श्रीमती सुचित्रा जायसवाल, कोषाध्यक्षा श्रीमती सुनीता जोशी और उपाध्यक्ष श्रीमती अरूणा टंडन सहित पूरे फाउंडेशन परिवार ने उनके प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता और स्नेह व्यक्त किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि वे जहाँ भी रहती हैं, अपने स्नेहिल व्यवहार से सबका दिल जीत लेती हैं।

जटिल गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) और महिला स्वास्थ्य से जुड़े संवेदनशील मामलों को बेहद कुशलता, धैर्य और आत्मीयता से संभालने वाली डॉ. गरिमा खन्ना मेहरोत्रा वाकई चिकित्सा जगत का एक दैदीप्यमान नक्षत्र हैं। ऐसे सेवाभावी और संवेदनशील व्यक्तित्व को ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ पुस्तक का भेंट किया जाना न केवल उनके प्रति समाज के अगाध सम्मान को दर्शाता है, बल्कि यह पावन प्रार्थना भी करता है कि जगत जननी माँ आदि शक्ति की दिव्य अनुकंपा उन पर सदैव बनी रहे, ताकि वे इसी प्रकार निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करती रहें और अपने सेवा पथ से पूरे समाज को आलोकित करती रहें।

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