लालकुआँ में आखिर ऐसा क्या हुआ कि वरिष्ठ समाजसेवी लाला जगदीश चंद्र अग्रवाल अचानक भावुक हो उठे, हर कोई जानने को बेताब

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लालकुआँ। समाज सेवा की दुनिया में अपनी एक अलग और अमिट पहचान बनाने वाले क्षेत्र के प्रख्यात समाजसेवी एवं प्रसिद्ध विचारक लाला जगदीश चंद्र अग्रवाल जी के जीवन में आज एक ऐसा अनूठा क्षण आया, जिसने उनके अंतर्मन को गहराई तक स्पर्श कर लिया। अध्यात्म और सेवा की त्रिवेणी जब एक साथ मिलती है, तो दृश्य कितना अलौकिक हो सकता है, इसका जीवंत उदाहरण आज देखने को मिला। एक विशेष मुलाकात के दौरान उन्हें कुछ ऐसा सौंपा गया, जिसे पाकर उनका चेहरा दैवीय आभा से चमक उठा और पूरा माहौल भक्ति के रंग में सराबोर हो गया।
दरअसल, लाला जगदीश चंद्र अग्रवाल जी को आज परम पावन पुस्तक आदि शक्ति माँ अवंतिका भेंट की गई। जैसे ही यह पवित्र ग्रंथ उनके हाथों में पहुँचा, उन्होंने इसे अत्यंत आदर, शालीनता और अगाध श्रद्धा के साथ अपने शीश से लगा लिया। लालकुआँ और आसपास के क्षेत्रों में जन-जन के दुखों को दूर करने और अपने उच्च विचारों से समाज को नई दिशा देने वाले लाला जी के इस रूप को देखकर वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध रह गया। लाला जी की सादगी, उनका परोपकारी स्वभाव और बौद्धिक क्षमता वैसे भी पूरे समाज के लिए हमेशा से मार्गदर्शक रही है, लेकिन आज उनकी आध्यात्मिक चेतना का एक नया और भव्य रूप सबके सामने आया।
माँ अवंतिका के प्रति लाला जगदीश चंद्र अग्रवाल जी की गहरी श्रद्धा और अटूट भक्ति सर्वविदित है। पुस्तक ग्रहण करते समय उनके चेहरे पर उभरा संतोष और दिव्य भाव इस बात का गवाह था कि वे माँ के चरणों में खुद को कितना समर्पित महसूस करते हैं। लाला जी ने इस अवसर पर बेहद भावुक मन से कहा कि माँ आदि शक्ति की कृपा के बिना जीवन में कोई भी परोपकारी कार्य संभव नहीं है। उन्होंने इस पावन भेंट को अपने जीवन की सबसे अमूल्य धरोहर बताया और कहा कि यह पुस्तक समाज में नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को जगाने में मील का पत्थर साबित होगी।
इस गरिमामयी और भावपूर्ण क्षण के साक्षी बने लोगों के बीच लाला जी के इस भक्तिमय स्वरूप की जमकर सराहना हो रही है। स्थानीय जनता का मानना है कि जब समाज का नेतृत्व करने वाला विचारक स्वयं अध्यात्म और आस्था की ऐसी गहरी समझ रखता हो, तो पूरे क्षेत्र का कल्याण निश्चित है। यह पावन भेंट आज पूरे क्षेत्र में एक सुखद चर्चा का विषय बनी हुई है।

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