पाताल भुवनेश्वर (उत्तराखंड) | विशेष रिपोर्ट
देवभूमि उत्तराखंड के गर्भ में अनगिनत रहस्य, चमत्कार और पौराणिक कथाएं आज भी जीवंत हैं। विज्ञान और आधुनिकता की चकाचौंध से दूर, कुमाऊं मंडल के पौराणिक तीर्थ स्थल पाताल भुवनेश्वर के समीप स्थित बृद्ध भुवनेश्वर क्षेत्र में एक ऐसा रहस्यमयी स्थान है, जो बड़े-बड़े विद्वानों को भी अचरज में डाल देता है। यहाँ सदियों के इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए हनुमान जी की एक ऐसी दुर्लभ और पौराणिक मूर्ति स्थापित है, जो पूरे विश्व में अद्वितीय मानी जाती है।
अद्भुत प्रतिमा का रहस्य: जब शनिदेव ने मांगी क्षमा
इस रहस्यमयी और अलौकिक मूर्ति की सबसे बड़ी विशेषता इसका चित्रण है। मूर्ति में कर्मफल दाता भगवान शनिदेव को पवनपुत्र हनुमान जी के चरणों में क्षमा याचना की दृष्टि (मुद्रा) में दर्शाया गया है।
पौराणिक आख्यानों में वर्णन मिलता है कि हनुमान जी के भक्तों पर शनिदेव का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। यह दुर्लभ मूर्ति इसी शाश्वत सत्य का साक्षात और ऐतिहासिक प्रमाण है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहाँ आकर सच्चे मन से बजरंगबली के दर्शन करता है, उस पर शनिदेव की वक्र दृष्टि कभी नहीं पड़ती और जीवन का हर भारी संकट मंदिर की चौखट के बाहर ही दम तोड़ देता है।
शनि दोषों से मिलती है अचूक मुक्ति
यहाँ भक्तों की अगाध श्रद्धा केवल कहानियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन के अनुभवों का हिस्सा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि हनुमान जी की इस विशेष प्रतिमा के दर्शन मात्र से बड़े से बड़ा अनिष्ट टल जाता है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री नीलम भण्डारी इस रहस्यमयी स्थान की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं, “भगवान शनिदेव के दोषों (जैसे शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा) से मुक्त होने के लिए यहाँ पर की गयी पूजा पूर्णतया फलदायी है। जो भक्त यहाँ आकर हनुमान जी के सम्मुख शीश नवाता है, उसे शनिदेव के प्रकोप से सदा के लिए अभयदान मिल जाता है।”
पाताल भुवनेश्वर: 33 कोटि देवी-देवताओं का गुप्त और रहस्यमयी निवास
बृद्ध भुवनेश्वर क्षेत्र में स्थित हनुमान जी की यह चमत्कारी मूर्ति जिस पाताल भुवनेश्वर धाम का हिस्सा है, उसकी अपनी महिमा भी अत्यंत गूढ़ और अलौकिक है।
पुराणों में वर्णन: स्कंद पुराण के ‘मानस खंड’ में पाताल भुवनेश्वर का विस्तार से वर्णन मिलता है। यह वह पवित्र गुफा है जहाँ माना जाता है कि भगवान शिव के साथ 33 कोटि देवी-देवता सूक्ष्म रूप में निवास करते हैं।
प्राकृतिक रहस्य: पृथ्वी के गर्भ में स्थित इस गुफा में चूना पत्थर (लाइमस्टोन) की चट्टानों से बनी प्राकृतिक आकृतियां हैं, जो शेषनाग, भगवान गणेश के कटे हुए सिर, कालभैरव, और स्वर्ग जाने के मार्ग को दर्शाती हैं।
चार धाम एक ही स्थान पर: यहाँ की एक अद्भुत मान्यता यह भी है कि पाताल भुवनेश्वर की गुफा के दर्शन करने से उत्तराखंड के चार धाम (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) की यात्रा के बराबर का पुण्य प्राप्त होता है।
कुल मिलाकर
बृद्ध भुवनेश्वर में हनुमान जी और शनिदेव जी की यह विलक्षण मूर्ति न केवल हमारी पौराणिक मान्यताओं की गहराई को दर्शाती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सच्ची भक्ति के आगे बड़े से बड़े ग्रह-नक्षत्र भी नतमस्तक हो जाते हैं। पाताल भुवनेश्वर की रहस्यमयी गुफाओं और इस दुर्लभ मूर्ति के दर्शन करने के लिए एक बार हर उस व्यक्ति को उत्तराखंड के इस दिव्य क्षेत्र में अवश्य आना चाहिए, जो जीवन में आध्यात्मिक शांति और संकटों से मुक्ति की तलाश में है।
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