लालकुआँ। कुमाऊँ की सांस्कृतिक अस्मिता, लोक परंपराओं और सामाजिक समरसता का प्रतीक उत्तरायणी मेला इस वर्ष लालकुआँ में पूरे उत्साह और भव्यता के साथ 11 जनवरी से 15 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है। मेले की तैयारियों, उद्देश्य और विशेष आकर्षणों को लेकर उत्तरायणी मेला समिति के संरक्षक श्री रंजीत बोरा से हुई विशेष बातचीत के प्रमुख अंश—
प्रश्न 1: इस वर्ष लालकुआँ में उत्तरायणी मेला कितने दिनों तक आयोजित होगा?
रंजीत बोरा: इस वर्ष उत्तरायणी मेला पांच दिवसीय होगा और इसे सांस्कृतिक गरिमा, अनुशासन एवं उत्साह के साथ संपन्न कराया जाएगा। मेला हमारी लोकसंस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने का माध्यम है।
प्रश्न 2: मेले के आयोजन का मूल उद्देश्य क्या है?
रंजीत बोरा: उत्तरायणी मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत है। इसका उद्देश्य लोककला, लोकसंगीत, पारंपरिक नृत्य और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देना है, साथ ही स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को मंच प्रदान करना है।
प्रश्न 3: दर्शकों के लिए इस बार मेले में क्या विशेष रहेगा?
रंजीत बोरा: मेले में झोड़ा-चांचरी, छोलिया नृत्य, सांस्कृतिक संध्याएं, भजन-कीर्तन, तथा बच्चों और युवाओं के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा स्थानीय हस्तशिल्प और पहाड़ी उत्पादों की दुकानों को विशेष रूप से सजाया जाएगा।
प्रश्न 4: व्यवस्थाओं और सुरक्षा को लेकर क्या तैयारियां की गई हैं?
रंजीत बोरा: मेला समिति द्वारा सुरक्षा, स्वच्छता, विद्युत व्यवस्था और यातायात नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन के सहयोग से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जा रही हैं।
प्रश्न 5: क्षेत्रवासियों के लिए आपका संदेश क्या है?
रंजीत बोरा: मैं सभी क्षेत्रवासियों से अपील करता हूँ कि वे परिवार सहित उत्तरायणी मेले में पधारें, अपनी संस्कृति से जुड़ें और मेले को सफल व ऐतिहासिक बनाने में सहयोग करें।
प्रश्न 6: भविष्य में उत्तरायणी मेले को लेकर आपकी क्या सोच है?
रंजीत बोरा: हमारी कोशिश है कि लालकुआँ का उत्तरायणी मेला आने वाले वर्षों में राज्य स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए और उत्तराखंड की लोकसंस्कृति का प्रमुख केंद्र बने।
कुल मिलाकर
उत्तरायणी मेला समिति के संरक्षक रंजीत बोरा के अनुसार, लालकुआँ में आयोजित होने वाला पांच दिवसीय उत्तरायणी मेला सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और लोक परंपराओं का जीवंत उत्सव सिद्ध होगा।
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