बिन्दुखत्ता।
जनता इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित पाँच दिवसीय उत्तरायणी मेला इस वर्ष अपनी सांस्कृतिक भव्यता, लोक परंपराओं की जीवंत प्रस्तुति और आत्मीय वातावरण के कारण जनमानस के हृदय में अमिट स्थान बना गया। मेले ने पर्वतीय संस्कृति की विविध रंगत को मंच प्रदान करते हुए क्षेत्रवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया।
मेले के दौरान पारंपरिक लोकनृत्य, लोकगीत, झोड़ा-चांचरी, छोलिया नृत्य, वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों और स्थानीय कलाकारों की मनोहारी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ग्रामीण जीवन, पहाड़ी परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत की झलक हर मंचन में साफ नजर आई।
समिति के अध्यक्ष दीप जोशी ने सफल आयोजन के लिए पूरी आयोजन समिति, स्वयंसेवकों, कलाकारों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के अथक परिश्रम से उत्तराखण्ड की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का यह प्रयास सार्थक सिद्ध हुआ। उन्होंने बताया कि मेले का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी लोकसंस्कृति से जोड़ना भी रहा है।
विशेष बात यह रही कि अतिथियों और आगंतुकों के सम्मान की परंपरा का पूरी गरिमा के साथ निर्वहन किया गया। स्वागत-सत्कार की आत्मीय शैली ने मेले में अपनत्व की आभा बिखेर दी, जिससे हर आगंतुक स्वयं को इस आयोजन का अभिन्न हिस्सा महसूस करता रहा।
समापन अवसर पर जनसमूह ने एक स्वर में इस आयोजन को “यादगार मेला” बताया और भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों की अपेक्षा जताई। बिन्दुखत्ता का यह उत्तरायणी मेला न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक भी सिद्ध हुआ।
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