लालकुआँ। उत्तराखंड की लोक आस्था और परंपराओं का गौरवशाली प्रतीक उत्तरायणी मेला इस बार विशेष आध्यात्मिक आभा के साथ सजेगा। पाँच दिवसीय उत्तरायणी महापर्व की तैयारियाँ तेज़ी से अंतिम रूप ले रही हैं। जगह–जगह रंग–रोगन, सांस्कृतिक मंचों का निर्माण, रोशनी एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का माहौल है।
उत्तरायणी मेला समिति के अध्यक्ष दीवान सिंह बिष्ट ने बताया कि इस वर्ष मेले की विशेष आकर्षण धुरी लोकदेवता इंसाफ के देवता गोलू देवता का भव्य डोला रहेगा। उन्होंने कहा कि गोलू देवता के डोले के साथ निकलने वाली भक्ति–मय यात्रा आस्था, लोक विश्वास और सांस्कृतिक समन्वय का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेगी। दूर–दराज़ क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं।
मेले में लोक संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिलेगा। जौनसारी, कुमाऊँनी और गढ़वाली लोकनृत्य, मांदर–ढोल की थाप, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूँज तथा स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियाँ मेले को जीवंत बनाएँगी। कुमाऊँ की विशेष झाँकियाँ, लोकगीतों की प्रस्तुति और क्षेत्रीय व्यंजनों के स्टॉल भी मेले की शोभा बढ़ाएँगे।
समिति के संरक्षक व वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि मेले के माध्यम से नई पीढ़ी को अपने लोकदेवताओं, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना प्रमुख उद्देश्य है। गोलू देवता के प्रति अद्वितीय श्रद्धा और न्याय के प्रति अटूट विश्वास से ओतप्रोत यह मेला जन–जन की आस्था का प्रतीक बनेगा।
मेले का शुभारंभ 11 जनवरी से होगा और पाँच दिनों तक श्रद्धा, संस्कृति और मनोरंजन का अनूठा समागम क्षेत्रवासियों को देखने को मिलेगा। सुरक्षा, यातायात और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन तथा मेला समिति द्वारा संयुक्त तैयारी की जा रही है। स्थानीय व्यपारियों में भी भारी उत्साह देखा जा रहा है।
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