“संघर्ष, सेवा और श्रद्धा की ज्योति : स्व० श्रीमती माधवी देवी का प्रेरणामयी जीवन”

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“संघर्ष, सेवा और श्रद्धा की ज्योति : स्व० श्रीमती माधवी देवी का प्रेरणामयी जीवन”
जीवन और मृत्यु इस संसार का शाश्वत सत्य हैं। जो आया है वह जाएगा, परन्तु कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो देह त्यागने के बाद भी अपने संस्कारों, कर्मों और प्रेम की सुगंध से सदा जीवित रहते हैं। स्वर्गीय श्रीमती माधवी देवी भी ऐसी ही पुण्यात्मा थीं, जिनका अकस्मात् 21 फरवरी को निधन हो गया। आगामी 4 मार्च को उनका पीपल पानी संस्कार संपन्न होगा।
मूल रूप से ग्राम बवियाड़ की निवासी तथा वर्तमान में किशनपुर रैक्वाल, गौलापार (हल्द्वानी) में निवासरत माधवी देवी ने अपने जीवन को संघर्ष, श्रद्धा और सेवा का पर्याय बना दिया। उनके पति स्वर्गीय श्री गिरीश चन्द्र बेलवाल जी का वर्ष 2010 में देहावसान हो गया था। पति के निधन के बाद उन्होंने जिस धैर्य, साहस और आत्मबल के साथ परिवार को संभाला, वह किसी तपस्विनी से कम नहीं था।

 संघर्षों में तपकर बनीं श्रद्धा की मूर्ति

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जीवन ने उन्हें अनेक परीक्षाओं से गुजारा, परंतु उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। ईष्ट देव के प्रति उनकी गहरी आस्था ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति थी। हर परिस्थिति में उनके होंठों पर प्रभु का नाम और हृदय में विश्वास की ज्योति प्रज्वलित रहती थी। वे मानती थीं कि “जो कुछ भी होता है, वह ईश्वर की इच्छा से और किसी बड़े कल्याण के लिए होता है।”
गरीब, असहाय और जरूरतमंदों की सहायता करना उनके जीवन का सहज स्वभाव था। बिना किसी दिखावे के वे सेवा करती थीं। किसी के घर में संकट हो, किसी को आर्थिक सहायता की आवश्यकता हो या किसी परिवार में दुख का समय माधवी देवी का स्नेहिल हाथ सदैव आगे रहता था।

 संस्कारों की धरोहर

उन्होंने दो पुत्रों और तीन पुत्रियों के भरे-पूरे परिवार को न केवल जन्म दिया, बल्कि उन्हें श्रेष्ठ संस्कार भी दिए। आज उनके परिवार में जो सादगी, सेवा-भाव और सामाजिक चेतना दिखाई देती है, वह उनकी ही जीवन साधना का प्रतिफल है।
उनके सुपुत्र चंदन बेलवाल तथा मुकेश बेलवाल (भाजपा के वरिष्ठ नेता) सामाजिक कार्यों में निरंतर सक्रिय रहते हैं। दोनों भाई समाज सेवा और जनहित के कार्यों में तत्पर रहते हुए अपनी मातृ-शिक्षा को सार्थक कर रहे हैं। परिवार की प्रत्येक संतति में उनकी दी हुई संस्कृति, मर्यादा और विनम्रता स्पष्ट झलकती है।

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 आत्मा अमर है…

भगवद्गीता का यह श्लोक मानो उनके जीवन को ही अभिव्यक्त करता है
न जायते म्रियते वा कदाचित्
नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥”
अर्थात आत्मा न कभी जन्म लेती है और न कभी मरती है। शरीर के नष्ट होने पर भी आत्मा अमर रहती है।
स्व० माधवी देवी ने केवल शरीर का परित्याग किया है, परन्तु उनकी आत्मा, उनके संस्कार, उनकी करुणा और उनकी आस्था सदा परिवार और समाज को आलोकित करती रहेगी। उनका जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि मनुष्य अपने कर्मों से अमर होता है।

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 एक ज्योति जो बुझकर भी प्रकाश दे गई

4 मार्च को पीपल पानी संस्कार के अवसर पर जब परिवार, रिश्तेदार और शुभचिंतक एकत्रित होंगे, तब आँखों में आँसू अवश्य होंगे, पर साथ ही हृदय में गर्व भी होगा कि उन्होंने ऐसी महान आत्मा के सान्निध्य में जीवन बिताया।
स्वर्गीय माधवी देवी का संपूर्ण जीवन एक आध्यात्मिक आवरण में लिपटा हुआ था जहाँ श्रद्धा थी, सेवा थी, संघर्ष था और सबसे बढ़कर था अटूट विश्वास।
ईश्वर उनकी पावन आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।

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