हल्द्वानी/लालकुआँ।
कुमाऊँ अंचल में आज जिस भव्यता और श्रद्धा के साथ बाबा श्री श्याम की भक्ति गूँज रही है, उसके मूल में जिन विभूतियों का योगदान रहा, उनमें पण्डित छोटे लाल शर्मा जी का नाम श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। यद्यपि कुमाऊँ में श्री श्याम के अनेक भक्त पूर्व से विद्यमान थे, किंतु समर्पण, संगठन और सतत साधना के माध्यम से श्याम भक्ति का विधिवत संचार करने वाले प्रथम ध्वजवाहक के रूप में पण्डित छोटे लाल शर्मा जी का स्थान विशिष्ट और अविस्मरणीय है।
श्याम भक्ति को मिला संगठित स्वरूप
22 नवम्बर 1995 का दिन कुमाऊँ में श्री श्याम भक्ति के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित है। इसी दिन रामलीला मैदान, हल्द्वानी में श्री श्याम सत्संग मण्डल, लालकुआँ–हल्द्वानी का विधिवत गठन हुआ। उसी ऐतिहासिक मैदान में आयोजित भव्य कीर्तन ने पूरे क्षेत्र को श्याममय कर दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कुमाऊँ में संगठित श्याम भक्ति का शंखनाद सिद्ध हुआ।
उस समय श्री श्याम सत्संग मण्डल के
संस्थापक अध्यक्ष पण्डित छोटे लाल शर्मा
आध्यात्मिक विचारधारा के धनी श्री शिवहरि चौमाल
(अध्यक्ष) श्री आर.एल. लखोटिया (संरक्षक) श्री सुरेश कुमार भौमियां (उपाध्यक्ष) श्री तरुण बंसल (मंत्री) श्री विधाधर शर्मा( उप मन्त्री कार्यक्रम के शाक्षी रहे।
श्याम भक्ति के विस्तार में समर्पित साधक
श्याम भक्ति के प्रचार-प्रसार में दिनेश अग्रवाल, मधु अग्रवाल सहित अनेक श्रद्धालुओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो आज भी उसी निष्ठा और भाव से बाबा श्री श्याम बाबा की सेवा में संलग्न हैं। इन सभी का योगदान श्याम भक्ति की इस यात्रा में स्तंभ के समान रहा है।
2002: जब श्याम नाम की गूँज हजारों हृदयों तक पहुँची
फरवरी 2002 में बाबा श्री श्याम के परम उपासक नन्दू जी महाराज जी की भारत यात्रा के दौरान, सेंचुरी पल्प एण्ड पेपर मिल स्टाफ कॉलोनी में आयोजित भव्य कीर्तन ने इतिहास रच दिया। यह इस क्षेत्र में बाबा श्री श्याम को समर्पित पहला विराट कीर्तन था, जिसकी गूँज ने पूरे कुमाऊँ में श्याम भक्ति को नया उत्साह और नई दिशा दी। इस आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और यहीं से श्री श्याम भक्ति जन-जन की आस्था का केन्द्र बनने लगी।
कुमाऊँ और बाबा श्री श्याम का पौराणिक नाता
यह उल्लेखनीय है कि कुमाऊँ की धरती और बाबा श्री श्याम का नाता पौराणिक काल से जुड़ा हुआ है।
भीमताल के समीप बनखंडी मंदिर क्षेत्र में बाबा की दादी हिडिंबा और दादा भीम की गहन आस्था रही है।
वहीं जनपद चम्पावत स्थित माँ अखिल तारिणी दरबार, बाबा श्री श्याम के पिता घटोत्कच की इष्ट देवी के रूप में विख्यात है। यह देवी पाण्डवों की भी आराध्य रही हैं, जिससे कुमाऊँ की धरती का श्याम परम्परा से अटूट संबंध प्रमाणित होता है।
सेंचुरी मिल से निकली श्याम ज्योति, बनी जन-आस्था का केन्द्र
आज यह गर्व के साथ कहा जा सकता है कि सेंचुरी पल्प एण्ड पेपर मिल से प्रज्वलित हुई श्री श्याम भक्ति की ज्योति पूरे क्षेत्र में प्रकाश फैला रही है। भक्तों की संख्या निरंतर बढ़ रही है और श्री श्याम सत्संग मण्डल के आयोजनों में अपार श्रद्धा उमड़ रही है।
कुल मिलाकर पण्डित छोटे लाल शर्मा जी ने जिस निष्ठा, समर्पण और संगठन शक्ति से श्री श्याम भक्ति को कुमाऊँ में प्रतिष्ठित किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भक्ति, सेवा और साधना का प्रेरक उदाहरण है। आज कुमाऊँ में गूँजता “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा” का स्वर, उनके अथक प्रयासों की जीवंत साक्षी है।
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