सड़क की पीड़ा, जनता की हुंकार हरीशताल मार्ग पर जनआक्रोश का प्रखर स्वर

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नैनीताल/स्यूड़ा–कौन्ता–पटरानी–ककोड़–हरीश ताल मोटर मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर क्षेत्रवासियों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रही इस महत्वपूर्ण सड़क के सुधार, मलबा सफाई, नाली निर्माण एवं मार्ग की बेहतरी की मांग को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन किया और संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंपा।

धरना-प्रदर्शन में जिला पंचायत सदस्य ककोड़ डीकर सिंह मेवाड़ी, ग्राम प्रधान कोंता हेमा बिष्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रतिनिधि महेंद्र कुमार, ककोड़ प्रधान प्रतिनिधि प्रेम सिंह मेवाड़ी, युवा कार्यकर्ता नरेश चंद्र, पूर्व ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह मेवाड़ी, सामाजिक कार्यकर्ता मोहन चंद्र, यशपाल आर्य, गणेश सिंह, दिनेश सिंह, चंनर राम (सरपंच प्रतिनिधि पटरानी), ग्राम प्रधान पटरानी प्रतिनिधि चंदन राम, प्रशांत सिंह (प्रधान प्रतिनिधि), शंकर सिंह, लाल सिंह, विद्याशंकर, कमल सिंह, मोहन सिंह, देवीदत्त, सुरेश राम, महेश चंद्र विक्की सहित दर्जनों ग्रामीणों ने सहभागिता की।

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स्थलीय निरीक्षण, आश्वासन और चेतावनी

जनदबाव के बाद PMGSY के मुख्य अभियंता, विभागीय अधिकारियों एवं सड़क निर्माण के ठेकेदार ने मौके पर पहुँचकर स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता द्वारा स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि सड़क पर पड़े मलबे की पूर्ण सफाई नाली निर्माण कार्य तथा पैच व मरम्मत कार्य
को दो दिन के भीतर पुनः प्रारंभ कर दिया जाएगा और शेष आवश्यक कार्य भी शीघ्रता से पूरे किए जाएंगे।
हालांकि जनता ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि तय समयसीमा में कार्य शुरू नहीं हुआ, तो PMGSY कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन और अनशन किया जाएगा। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक सड़क का कार्य पूर्ण नहीं होगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

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अनशन की चेतावनी

इधर सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश बिष्ट ने मुख्य अभियंता व विभागीय अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तत्काल प्रभाव से कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और जनता के साथ PMGSY कार्यालय के बाहर अनशन पर बैठेंगे। उनका कहना था कि अब केवल आश्वासन नहीं, जमीनी कार्रवाई चाहिए।

हरीशताल : प्रकृति, आस्था और पर्यटन का अनमोल उपहार
यहाँ यह भी बताते चले कि हरीशताल केवल एक सड़क का अंतिम बिंदु नहीं, बल्कि कुमाऊँ की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अनुपम प्रतीक है। देवदारों से आच्छादित शांत वातावरण, स्वच्छ जल, हरियाली और पवित्रता से भरपूर हरीशताल क्षेत्र पर्यटन, साधना और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है।
यह मार्ग सुचारु होने से न केवल स्थानीय ग्रामीणों को सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यटन, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
आज हरीशताल की ओर जाती यह सड़क मानो कह रही है
“रास्ते अगर संवर जाएँ, तो मंज़िलें खुद चलकर आती हैं।”