लालकुआँ/पच्चीस एकड़ कॉलोनी रोड स्थित भोला मंदिर के सामने राधे–राधे सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित राम कथा के चौथे दिन भक्तिरस अपने चरम पर दिखाई दिया। कथावाचक डा० पंकज मिश्रा ‘मयंक’ ने प्रभु श्रीराम के दिव्य चरित्र और राम जन्म प्रसंग का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि पाण्डाल बार-बार “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठा।
डा० मयंक ने कहा कि भगवान का अवतार अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए होता है। प्रभु श्रीराम ने बाल्यावस्था से ही असुरों का संहार कर संसार को यह संदेश दिया कि सत्य, मर्यादा और करुणा ही जीवन का आधार हैं। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन को पिता, माता और भ्रातृ प्रेम का शाश्वत आदर्श बताते हुए कहा कि यह चरित्र अनंत युगों तक मानवता को मार्गदर्शन देता रहेगा।
कथा के दौरान राजा दशरथ के संतानहीन होने की व्यथा, कुलगुरु वशिष्ठ के परामर्श पर श्रृंगी ऋषि द्वारा पुत्रकामेष्टि यज्ञ, और उसके फलस्वरूप प्रभु श्रीराम के अवतरण की कथा को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। राम जन्म का प्रसंग सुनते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और सम्पूर्ण पाण्डाल भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
इस अवसर पर मुख्य यजमान श्रीमती एवं श्री कुलदीप मिश्रा तथा श्रीमती एवं श्री राजेन्द्र राठौर रहे। कथा श्रवण हेतु भाजपा के प्रदेश महामंत्री दीपेन्द्र कोश्यारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन में संजीव शर्मा, जीवन कब्डवाल, दीवान सिंह बिष्ट, अरुण जोशी, विनोद श्रीवास्तव, बौबी सम्मल, उमेश तिवारी, हरीश नैनवाल, अनिल सिंह, धर्मवीर मौर्या, अशोक पाठक, पंचम लाल, शैलेन्द्र सिंह, महेश कश्यप, राजेन्द्र अग्निहोत्री, रोहन चौधरी, हेम रुबाली लखन मेहता, रामस्वरूप, ओ.पी. अग्निहोत्री, गुड़िया शाह, पूजा कश्यप, पूर्णिमा, पिंकी मौर्या सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
राम कथा का यह दिवस आस्था, संस्कार और मर्यादा का जीवंत संदेश बनकर श्रद्धालुओं के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।
दीपेन्द्र कोश्यारी का संदेश
राम कथा के दौरान उपस्थित भाजपा के प्रदेश महामंत्री दीपेन्द्र कोश्यारी ने कहा कि
“राम कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली महान प्रेरणा है। प्रभु श्रीराम का जीवन चरित्र सत्य, मर्यादा, त्याग और कर्तव्य का अद्भुत उदाहरण है। आज के समय में समाज को राम के आदर्शों को अपनाने की सबसे अधिक आवश्यकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि “ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में आपसी सद्भाव, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। राधे–राधे सेवा समिति द्वारा किया गया यह आयोजन सराहनीय है, जो नई पीढ़ी को अपनी सनातन संस्कृति से जोड़ने का कार्य कर रहा है।”
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