रोजाना 9 टन कचरा और जलते प्लास्टिक की खामोश गूंज: भीमताल वेस्ट सर्वे की वो रिपोर्ट, जो सबको सोचने पर मजबूर कर देगी

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भीमताल (जनपद नैनीताल)
दिनांक: 19 जुलाई, 2026 खण्ड विकास कार्यालय, भीमताल एवं नीलकंठ जीरो वेस्ट सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राफिक एरा के विद्यार्थियों ने किया ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का बेसलाइन सर्वे; ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना तैयार करने में मिलेगी सहायता

भीमताल। खण्ड विकास कार्यालय, भीमताल एवं नीलकंठ जीरो वेस्ट सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर के बीबीए तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं द्वारा भीमताल विकासखण्ड के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित विस्तृत वेस्ट बेसलाइन सर्वे सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया।

इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य भीमताल क्षेत्र में वर्तमान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था, कचरा संग्रहण एवं निस्तारण प्रणाली, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, जन-जागरूकता, नागरिक संतुष्टि तथा पर्यावरणीय दृष्टिकोण का अध्ययन करना था। सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग भविष्य में विकासखण्ड भीमताल के ग्रामीण क्षेत्रों हेतु वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना तैयार करने के साथ-साथ शैक्षणिक एवं शोध कार्यों में भी किया जाएगा।

सर्वेक्षण का क्षेत्र एवं कार्यप्रणाली

यह सर्वेक्षण छह सदस्यीय छात्र दल—हिमांशु नेगी, ब्योम जोशी, विवेक दानू, कृष्णा रावल, कृष्णा दसिला एवं आकेश वर्मा—द्वारा नीलकंठ जीरो वेस्ट सोसाइटी तथा खण्ड विकास कार्यालय, भीमताल के मार्गदर्शन में सम्पन्न किया गया।

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सर्वेक्षण के अंतर्गत निम्न क्षेत्रों को शामिल किया गया—

शहरी क्षेत्र: भीमताल नगर पालिका के सभी 9 वार्ड।

ग्रामीण क्षेत्र: विकासखण्ड भीमताल की 3 न्याय पंचायतों—सांगुड़ीगांव, मेहरागांव एवं रानीबाग के अंतर्गत आने वाले 23 ग्रामों के कुल 304 परिवार।

सर्वेक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने घर-घर जाकर साक्षात्कार, प्रत्यक्ष अवलोकन एवं आमने-सामने संवाद के माध्यम से प्राथमिक आंकड़े एकत्रित किए। अध्ययन में कचरा उत्पादन, संग्रहण व्यवस्था, कचरा पृथक्करण, निस्तारण के तरीके, पर्यावरणीय जागरूकता, उपयोगकर्ता शुल्क देने की इच्छा तथा स्थानीय आवश्यकताओं का विस्तृत आकलन किया गया।

सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष

1. शहरी क्षेत्र (भीमताल नगर पालिका)

* भीमताल नगर पालिका क्षेत्र में प्रतिदिन औसतन 8.4 टन ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जो पर्यटन सीजन में बढ़कर लगभग 9 टन प्रतिदिन तक पहुँच जाता है।
* नगर पालिका के 18.4 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में स्थित 9 वार्डों के लिए 8 कचरा संग्रहण वाहन संचालित हैं।
* सभी वार्डों में नियमित डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था उपलब्ध है तथा अधिकांश परिवार स्रोत पर कचरे का पृथक्करण करते हैं।
* प्रति परिवार ₹30–₹50 प्रतिमाह उपयोगकर्ता शुल्क लिया जाता है। इसके अतिरिक्त 20 कमरों तक के होमस्टे से ₹200 तथा छोटे रेस्टोरेंट से ₹500 प्रतिमाह शुल्क लिया जाता है।
* नगर पालिका क्षेत्र के अधिकांश नागरिक वर्तमान कचरा प्रबंधन व्यवस्था से संतुष्ट पाए गए।
* भूमि की अनुपलब्धता के कारण भीमताल में वर्तमान में कोई कचरा प्रसंस्करण (Processing) संयंत्र उपलब्ध नहीं है, इसलिए एकत्रित कचरे का निस्तारण हल्द्वानी ट्रेंचिंग ग्राउंड में किया जाता है।

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2. ग्रामीण क्षेत्र (3 न्याय पंचायतें)

ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित कचरा संग्रहण व्यवस्था उपलब्ध न होने के कारण अधिकांश परिवार पारंपरिक अपशिष्ट निस्तारण पद्धतियों पर निर्भर हैं।

* गीला (जैविक) कचरा मुख्यतः गाय, भैंस, बकरी एवं अन्य घरेलू पशुओं को खिलाया जाता है, जो जैविक कचरे के प्रबंधन की एक सकारात्मक एवं पर्यावरण-अनुकूल परंपरा है।
* सूखा कचरा जैसे प्लास्टिक, कांच एवं पैकेजिंग सामग्री का निस्तारण प्रायः खुले में फेंकने, जलाने अथवा डंप करने के माध्यम से किया जाता है, जो पर्यावरणीय दृष्टि से चिंता का विषय है।
* सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि पर्यावरण के प्रति जागरूक ग्रामीण परिवार नियमित कचरा संग्रहण व्यवस्था उपलब्ध होने पर लगभग ₹50 प्रतिमाह उपयोगकर्ता शुल्क देने के इच्छुक हैं, जबकि अनेक परिवार अभी भी पारंपरिक व्यवस्था को पर्याप्त मानते हैं।

3. ग्राम प्रधानों के सुझाव

सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त फीडबैक में डुनसिल एवं चकबहेड़ी ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पृथक बजट, सफाई कर्मियों एवं कचरा संग्रहण वाहन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं अमिया एवं खैरोला पांडे ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने वर्तमान पारंपरिक व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।

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आगे की कार्ययोजना

खण्ड विकास अधिकारी, भीमताल श्री हर्षित गर्ग ने बताया कि सर्वेक्षण से प्राप्त आधारभूत आंकड़े विकासखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। प्रस्तावित कार्ययोजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक डस्टबिन स्थापित करने, स्रोत पर कचरा पृथक्करण को बढ़ावा देने, प्लास्टिक कचरे को खुले में जलाने की प्रवृत्ति रोकने हेतु जन-जागरूकता अभियान संचालित करने, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) व्यवस्था विकसित करने तथा भविष्य में नगर पालिका की कचरा संग्रहण सेवाओं का समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों तक चरणबद्ध विस्तार करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा।

खण्ड विकास अधिकारी ने नीलकंठ जीरो वेस्ट सोसाइटी, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं एवं समस्त सहयोगियों के इस जनहितैषी प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन, शिक्षण संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों की सहभागिता से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक स्थायी एवं प्रभावी मॉडल विकसित किया जा सकेगा।

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