हल्द्वानी।
कुछ लोग केवल जीवन बिताते नहीं, बल्कि अपने अद्भुत संस्कार, अनुशासन, विनम्रता और सेवाभाव से पूरे समाज के हृदय में स्थायी स्थान बना लेते हैं। वे जहाँ भी रहते हैं, वहाँ करुणा, आस्था और मानवता की अलख जगाते हैं। ऐसे ही दिव्य व्यक्तित्व के धनी थे देवललौड़ क्षेत्र के पाण्डे निवाड़, हल्द्वानी निवासी स्वर्गीय श्री हरिशचन्द्र सिंह बिष्ट ‘सेनापति जी’। आज वे भले ही इस नश्वर संसार से विदा ले चुके हों, किंतु उनकी पावन स्मृतियाँ, उनके आदर्श और जीवन मूल्यों की छाप समाज के हृदयों में सदैव उज्ज्वल बनी रहेगी।
बुधवार को लगभग 82 वर्ष की आयु में उन्होंने शांत और संतुलित भाव से देह त्याग कर अपनी अनंत यात्रा की ओर प्रस्थान किया। गुरुवार को पवित्र पौराणिक तीर्थ चित्रशिला घाट पर हजारों नम आंखों के बीच उन्हें अंतिम विदाई दी गई। विदाई का दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था परिजन, संबंधी, जनप्रतिनिधि और मित्रगण अश्रुपूरित नेत्रों से अपने प्रिय ‘सेनापति जी’ को निहारते रहे। इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट भी पहुंचे और उन्होंने दिवंगत आत्मा के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। पार्थिव शरीर को उनके पुत्र विजेन्द्र बिष्ट ने मुखाग्नि दी।
स्वर्गीय बिष्ट जी का जीवन अध्यात्म, अनुशासन और सेवा का अद्भुत संगम रहा। निर्माण निगम में अधिकारी रहते हुए उन्होंने कर्मठता और ईमानदारी का प्रतिमान स्थापित किया। सामाजिक जीवन में वे सदैव विनम्र, सहज और सरल स्वभाव के रहे। न्यायकारी देवता गोलज्यू भगवान सहित देवभूमि के तीर्थस्थलों के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। पहाड़ की संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन के संरक्षण के लिए उनका हृदय सदैव स्पंदित रहता था।
मानवता के प्रति गहरी करुणा उनके व्यक्तित्व का मुख्य आधार रही। जो भी व्यक्ति अभाव, पीड़ा या कठिनाई में मिलता, उसकी सहायता के लिए वे बिना दिखावे के चुपचाप आगे आ खड़े होते।
असहायों की मदद करना, दुखी लोगों को सांत्वना देना और जरूरतमंदों के लिए संसाधन जुटाना उनके जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन गया था। युवाओं को अनुशासन, खेलकूद और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करने का उनका सतत प्रयास उन्हें युवा पीढ़ी का प्रिय मार्गदर्शक बनाता रहा।
उनके निधन के बाद समूचे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त हो गई। विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक और चिकित्सा क्षेत्र की विभूतियों ने उनके देहावसान पर गहरा दुख व्यक्त किया और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की चिरशांति की प्रार्थना की। अनेक स्थानों से शोक संदेश लगातार प्राप्त होते रहे, जो उनके व्यापक प्रभाव और जन-प्रियता का प्रमाण हैं।
स्व. हरिशचन्द्र सिंह बिष्ट के पावन संस्कार आज भी जीवित हैं।
उनके पदचिह्नों पर चलते हुए उनके सुपुत्र श्री विज्रेश बिष्ट समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते हैं और अपने पिता के आदर्शों को जीवन का लक्ष्य बनाकर सेवा-भावना की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके भीतर बसने वाली विनम्रता, करुणा और लोकसेवा की भावना, पिता की जीवित विरासत के रूप में निरंतर समाज का मार्गदर्शन कर रही है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को परम शांति प्रदान करे और शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुख सहन करने की शक्ति दे।
स्व. सेनापति जी को शत्-शत् नमन।
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