सत्य साधक श्री विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने मथुरा में किए माँ पीताम्बरा के भव्य दर्शन, लोक कल्याण हेतु किया विशेष अनुष्ठान

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​मथुरा (विशेष संवाददाता):
ब्रज की पावन धरा मथुरा में उस समय एक अद्भुत और दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया, जब प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु एवं सत्य साधक श्री विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने माँ पीताम्बरा के दरबार में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। गुरुजी ने यहाँ पूर्ण भक्ति-भाव और वैदिक विधि-विधान के साथ माई के दर्शन किए तथा विश्व शांति एवं ‘लोक कल्याण’ के महान उद्देश्य को लेकर एक विशेष पूजन संपन्न किया।

​भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हुआ वातावरण

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, जैसे ही सत्य साधक श्री विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी के मथुरा स्थित माँ पीताम्बरा मंदिर पहुँचने का समाचार मिला, स्थानीय भक्तों और उनके अनुयायियों में भारी उत्साह की लहर दौड़ गई। मंदिर परिसर में गुरुजी के आगमन पर “जय माँ पीताम्बरा” के जयकारों और शंखनाद से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो उठा। माई के भक्तों और मंदिर प्रबंधन ने अत्यंत आदर और सत्कार के साथ गुरुजी का स्वागत किया।

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​लोक कल्याण हेतु विशेष पूजन और अनुष्ठान

​श्री विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर शत्रु नाशिनी, राजराजेश्वरी माँ पीताम्बरा (माता बगलामुखी) की विशेष आराधना की।
​पीत वस्त्रों और पुष्पों से श्रृंगार: गुरुजी द्वारा माता को पीले पुष्प, पीत वस्त्र, हल्दी और विशेष पूजन सामग्री अर्पित की गई।
​वैदिक मंत्रोच्चार: घंटों तक चले इस सात्विक अनुष्ठान में वैदिक मंत्रों का सस्वर पाठ किया गया।
​परमार्थ की भावना: इस महापूजन का मुख्य संकल्प व्यक्तिगत न होकर संपूर्ण रूप से ‘लोक कल्याण’ था। गुरुजी ने समाज में व्याप्त दुखों के नाश, राष्ट्र की सुख-समृद्धि और मानव जाति की भलाई के लिए माता के चरणों में प्रार्थना की।

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सत्य और परोपकार का दिया संदेश

पूजन और आरती के उपरांत, सत्य साधक श्री विजेन्द्र पाण्डे जी ने वहां उपस्थित विशाल जनसमूह को अपना अमूल्य आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने अपने आध्यात्मिक उद्बोधन में कहा:
​”माँ पीताम्बरा की साधना केवल बाह्य शत्रुओं का ही नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर बैठे काम, क्रोध, लोभ और अहंकार रूपी शत्रुओं का भी नाश करती है। वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व को सत्य, शांति और परोपकार की आवश्यकता है। निष्काम भाव से की गई सेवा ही सच्ची ईश्वर आराधना है।”

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​प्रसाद वितरण एवं समापन

​आयोजन के अंतिम चरण में माता का पवित्र जल और प्रसाद सभी भक्तों के बीच वितरित किया गया। गुरुजी द्वारा किए गए इस निस्वार्थ और लोक कल्याणकारी अनुष्ठान की संपूर्ण मथुरा क्षेत्र और संत समाज में भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है। इस दिव्य आयोजन के साक्षी बने सभी श्रद्धालु स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मान रहे हैं और क्षेत्र में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया जा रहा है।

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