लालकुआँ (नैनीताल)।
सेंचुरी पल्प एण्ड पेपर मिल (सेंचुरी मिल), लालकुआँ के गौरवशाली इतिहास में आज एक भावुक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। मिल के डी.एम. प्लान्ट में बतौर वरिष्ठ अधिकारी अपनी अतुलनीय सेवाएँ देने वाले श्री ललित मोहन मेलकानी के सेवानिवृत्त होने पर मिल प्रशासन और उनके साथी कर्मचारियों द्वारा एक बेहद भव्य और भावभीनी विदाई समारोह का आयोजन किया गया।
मिल परिसर स्थित कैन्टीन सभागार में आयोजित इस समारोह में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जो श्री मेलकानी की लोकप्रियता और उनके प्रति अगाध सम्मान का प्रत्यक्ष प्रमाण था।
फूल मालाओं से लादे गए ‘कर्मवीर’, अश्रुपूरित आँखों से हुआ स्वागत
विदाई समारोह का प्रारंभ अत्यंत भावनात्मक रहा। जैसे ही श्री ललित मोहन मेलकानी ने सभागार में प्रवेश किया, पूरा हॉल गगनभेदी तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहाँ मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर श्रमिक भाइयों तक, हर कोई अपने प्रिय साथी की एक झलक पाने और उन्हें सम्मानित करने को आतुर दिखा।
उन्हें मंच तक एक भव्य जुलूस के रूप में ले जाया गया। इस दौरान मिल के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों, यूनियन पदाधिकारियों और स्नेहियों ने उन पर फूलों की वर्षा की। श्री मेलकानी को इतनी फूल-मालाएँ पहनाई गईं कि वे फूलों के पहाड़ के बीच मुस्कुराते हुए सौम्य व्यक्तित्व के रूप में नजर आए। यह केवल फूलों का श्रृंगार नहीं था, बल्कि यह उनके 36 वर्षों के बेदाग कार्यकाल, मिल के प्रति उनके समर्पण और उनके मिलनसार स्वभाव के प्रति हर एक कर्मचारी का अनमोल स्नेह था। कई साथियों की आँखें इस दृश्य को देख नम हो गईं।
कार्यकाल की भव्य सराहना: “ललित जी केवल अधिकारी नहीं, सेंचुरी मिल की धरोहर हैं” – नरेश चन्द्रा
समारोह को संबोधित करते हुए सेंचुरी मिल के उपाध्यक्ष श्री नरेश चन्द्रा ने श्री ललित मोहन मेलकानी के योगदान की मुक्तकंठ से सराहना की और उनके कार्यकाल को “मिल के लिए एक स्वर्ण युग” बताया।
अपने विस्तारपरक संबोधन में श्री नरेश चन्द्रा ने कहा—
”श्री ललित मोहन मेलकानी जी का मिल से अलग होना हमारे लिए एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है। पिछले साढ़े तीन दशकों से भी अधिक समय तक, उन्होंने डी.एम. प्लान्ट जैसी महत्वपूर्ण इकाई को न केवल संभाला, बल्कि अपनी तकनीकी सूझबूझ और कड़ी मेहनत से उसे ऊंचाइयों तक पहुँचाया। ललित जी जैसे अधिकारी विरले ही होते हैं, जो पद की गरिमा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखते हैं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और हर चुनौती को मुस्कुराकर स्वीकार करने का उनका अंदाज़, मिल की आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करेगा। सेंचुरी मिल परिवार उनकी सेवाओं के लिए सदैव ऋणी रहेगा और हम उनके सुखद व स्वस्थ भावी जीवन की कामना करते हैं।”
निष्ठा और ईमानदारी का बेमिसाल सफर: 16 अप्रैल 1990 से आज तक
श्री ललित मोहन मेलकानी ने 16 अप्रैल 1990 को सेंचुरी पल्प एण्ड पेपर मिल में अपनी सेवा शुरू की थी। लगभग 36 वर्षों के इस लंबे सफर में, मिल ने कई उतार-चढ़ाव देखे, तकनीकें बदलीं, प्रबंधन बदला, लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वह थी ललित जी की मिल के प्रति निष्ठा।
वे केवल एक सरकारी समय सारिणी का पालन करने वाले अधिकारी नहीं थे; उन्होंने मिल को अपना घर माना। डी.एम. प्लान्ट, जो मिल के संचालन के लिए रक्तवाहिका की तरह काम करता है, वहाँ ललित जी की उपस्थिति ही निश्चिंतता की गारंटी थी। उनके पूरे कार्यकाल में उनकी ईमानदारी पर कभी कोई आंच नहीं आई। वे एक ऐसे निष्ठावान ‘कर्मयोगी’ रहे, जिन्होंने सदैव ‘स्व’ से ऊपर ‘संस्था’ को रखा। उनकी बेदाग छवि और अनुशासित कार्यशैली ने उन्हें प्रबंधन और श्रमिकों दोनों के बीच समान रूप से आदरणीय बनाया।
साथियों के विचार: “हमने एक सहकर्मी नहीं, एक बड़ा भाई खोया है”
इस अवसर पर उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले अनेक साथियों ने भी अपने विचार रक्खे और पुरानी यादों को ताज़ा किया। सभी वक्ताओं की बातों का सार श्री मेलकानी के प्रति सम्मान और उनके बिछुड़ने का गम था।
सभी साथियों ( खुशाल सिंह रावत, आलोक जैन, अशोक खुल्बे, हेम चन्द्र पन्त, भरत पाण्डे, रितुल शर्मा, शौरभ पाण्डे, पवन चौधरी, सुमित वर्मा, चन्द्रशेखर लोहनी, मनोज चतुर्वेदी, आर के शर्मा, शशि रावत, शेर सिंह दानू, गिरीश जोशी आदि) की ओर से सामूहिक रूप से व्यक्त किए गए विचार:
”ललित मेलकानी जी के जाने से आज डी.एम. प्लान्ट सूना हो गया है। हमारे लिए वे केवल एक वरिष्ठ अधिकारी नहीं थे, बल्कि एक बड़े भाई और मार्गदर्शक थे। कार्यस्थल पर जब भी कोई तकनीकी समस्या आती या हम हताश होते, वे हमेशा ‘जादू की झप्पी’ की तरह समाधान और हौसला लेकर खड़े रहते थे। उनकी सबसे बड़ी खूबी थी कि उन्होंने कभी किसी पर अधिकारी होने का रौब नहीं झाड़ा, हमेशा प्यार और सम्मान से काम लिया। उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा और ‘सब ठीक हो जाएगा’ कहने का अंदाज़ हमें बहुत याद आएगा। हमने उनसे न केवल काम सीखा, बल्कि एक अच्छा इंसान बनना भी सीखा। वे मिल से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, हमारे दिलों से नहीं।”
गरमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक विदाई समारोह में मिल के कोने-कोने से अधिकारी और कर्मचारी एकत्र हुए। इस अवसर पर मुख्य रूप से दिनेश जोशी, लक्ष्मी दत्त सूतेड़ी, आनन्द सिंह रजवार, वरुण डोगरा, प्रांजल मेलकानी, दिनेश भट्ट, हामिद हसन, मोहन गिरी, राम चन्द्र, लाल सिंह जीना, जगन्नाथ, अखिलेश मिश्रा, लल्लन सिंह, मुकेश लोशाली, पूरन जीना, मुकेश, दुर्गा सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी, श्रमिक और यूनियन प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने अश्रुपूरित आँखों से अपने प्रिय साथी को विदा किया।
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