विशेष अतिथि: श्री दीप जोशी (अध्यक्ष, मेला समिति)
(परिचय):
बिन्दुखत्ता,उत्तरायणी यानी मकर संक्रांति का पावन पर्व, और इस अवसर पर कुमाऊँ की लोक संस्कृति का सबसे बड़ा उत्सव आज से बिन्दुखत्ता की धरती पर शुरू होने जा रहा है। आज से पाँच दिनों तक यहाँ गीतों, नृत्यों और आस्था का संगम देखने को मिलेगा। इस भव्य आयोजन की तैयारियों और रूपरेखा पर बात करने के लिए आज हमारे साथ मौजूद हैं, मेला समिति के अध्यक्ष श्री दीप जोशी जी।
दीप जी, आपका बहुत-बहुत स्वागत है।
प्रश्न 1: दीप जी, आज से पाँच दिवसीय उत्तरायणी मेले का शुभारंभ हो रहा है। कैसा उत्साह देख रहे हैं आप क्षेत्रवासियों में?
दीप जोशी: धन्यवाद। देखिए, बिन्दुखत्ता सिर्फ एक क्षेत्र नहीं, बल्कि ‘मिनी कुमाऊँ’ है। यहाँ के हर घर में पहाड़ की धड़कन बसती है। आज जब हम इस मेले का आगाज कर रहे हैं, तो लोगों में अभूतपूर्व उत्साह है। यह मेला सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का एक माध्यम है। बच्चे, बुजुर्ग और युवा, सभी इस पल का साल भर इंतजार करते हैं।
प्रश्न 2: किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत ईष्ट देवों की आराधना से होती है। आज मेले का शुभारंभ किन धार्मिक अनुष्ठानों के साथ किया जा रहा है?
दीप जोशी: बिल्कुल सत्य कहा आपने। हमारी संस्कृति में देव-आराधना सर्वोपरि है। आज के कार्यक्रम की शुरुआत साक्षात माँ हाट कालिका की वन्दना के साथ होगी। माँ हाट कालिका हमारे रक्षक और आस्था का केंद्र हैं। इसके साथ ही भगवान महाविन्देश्वर की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
हमारा मानना है कि जब माँ कालिका और भोलेनाथ का आशीर्वाद हमारे साथ होगा, तभी यह आयोजन निर्विघ्न और भव्य रूप से संपन्न होगा। पूजा के बाद ही विधिवत रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंच खुलेगा।
प्रश्न 3: अगले पाँच दिनों तक बिन्दुखत्ता वासियों को इस मेले में क्या कुछ खास देखने को मिलेगा?
दीप जोशी: हमने इन पाँच दिनों को अलग-अलग रंगों में पिरोया है।
दिन में स्कूली बच्चों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिससे नई पीढ़ी अपनी संस्कृति को जान सके।
शाम को कुमाऊँ के प्रसिद्ध लोक कलाकार अपनी आवाज़ का जादू बिखेरेंगे।
छोलिया नृत्य, झोड़ा-चांचरी और हुड़का वादन के बिना तो उत्तरायणी अधूरी है, उसका भी विशेष प्रबंध है।
इसके अलावा, स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए हैं ताकि लोग पहाड़ी स्वादों का आनंद ले सकें।
प्रश्न 4: एक अध्यक्ष के तौर पर, इतनी बड़ी व्यवस्था को संभालना कितना चुनौतीपूर्ण रहा और अपनी टीम के लिए आप क्या कहना चाहेंगे?
दीप जोशी: चुनौती तो बड़ी थी, लेकिन जब उद्देश्य पवित्र हो और टीम समर्पित हो, तो सब आसान हो जाता है। यह मेरी अकेले की मेहनत नहीं है, पूरी मेला समिति के एक-एक कार्यकर्ता ने दिन-रात एक किया है। स्थानीय प्रशासन और बिन्दुखत्ता की जनता का सहयोग भी हमें भरपूर मिला है। यह मेला ‘हमारा’ मेला है, किसी एक व्यक्ति का नहीं।
प्रश्न 5: अंत में, आप बिन्दुखत्ता और आसपास के क्षेत्रवासियों से क्या अपील करना चाहेंगे?
दीप जोशी: मेरी सभी माताओं-बहनों और युवा साथियों से यही अपील है कि आप भारी संख्या में सपरिवार यहाँ आएं। आज हाट कालिका की वन्दना के समय से ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। यह मेला आपकी धरोहर है। आइए, मिलकर अपनी लोक संस्कृति को विश्व पटल पर पहचान दिलाएं और इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाएं।
हमसे बात करने के लिए और इतनी शानदार तैयारियों के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई।
जय उत्तराखंड, जय माँ हाट कालिका!
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