बिन्दुखत्ता यहाँ ढलान चक्की के भूमिया मन्दिर में चल रही श्री शिव महापुराण में उत्तरकाशी के हरि पर्वत से पधारे चन्द्रशेखर गिरी महाराज ने उत्तरकाशी की दिव्य महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड का प्रत्येक कण शिव-शक्ति की उपासना से आलोकित है, किंतु इन सभी पावन स्थलों में उत्तरकाशी का स्थान सर्वोपरि है, जिसे शास्त्रों में हिमालय की वाराणसी कहा गया है।
महाराज ने कहा कि जैसे काशी विश्वनाथ की महिमा संसार में अद्वितीय है, उसी प्रकार उत्तरकाशी में स्थित भगवान भोलेनाथ का दरबार शिवभक्तों के लिए स्वयं महादेव की अनुपम सौगात है। स्कंद पुराण में उत्तरकाशी का अत्यंत गोपनीय और रहस्यमय वर्णन मिलता है, जो इसे कलियुग में भी मुक्तिदायक तीर्थ सिद्ध करता है।
चन्द्रशेखर गिरी महाराज ने स्कंद पुराण का उल्लेख करते हुए बताया कि देवर्षि नारद द्वारा की गई जिज्ञासा पर भगवान स्कंद ने जिस पुण्य क्षेत्र का वर्णन किया, वही सौम्यकाशी अर्थात उत्तरकाशी है। यह वही भूमि है जहाँ पवित्र भागीरथी गंगा उत्तरवाहिनी हैं, जहाँ असी और वरुणा नदियाँ दिव्य रूप में विद्यमान हैं और जहाँ ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश तीनों का निवास माना गया है।
उन्होंने कहा कि यही वह क्षेत्र है जहाँ भगवान परशुराम ने शिव की घोर तपस्या की, जहाँ ऋषियों-मुनियों के आश्रम स्थापित हुए और जहाँ साधना से अलौकिक सिद्धियाँ प्राप्त हुईं। शास्त्रों में यहाँ तक कहा गया है कि उत्तरकाशी में शिव दर्शन मात्र से पुनर्जन्म का बंधन समाप्त हो जाता है।
महाराज ने स्कंद पुराण में स्वयं महादेव द्वारा कही गई वाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि
“जब संसार में पाप की वृद्धि होगी, तब मैं समस्त तीर्थों के साथ काशी सहित हिमालय में निवास करूँगा। केदारमण्डल में मैं पूर्ण रूप से विराजमान रहता हूँ। काशी जैसी यह मेरी पूर्ण काशी है, इसमें कोई भेद नहीं है।”
उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी को अविमुक्त क्षेत्र कहा गया है, क्योंकि महादेव स्वयं इसे कभी नहीं छोड़ते। यहाँ किया गया जप, तप, हवन और दान अक्षय फल प्रदान करता है। इस पावन भूमि में स्नान, उपवास और शिव पूजन करने वाला जीव चाहे जहाँ भी शरीर त्याग करे, वह शिवलोक को प्राप्त करता है।
चन्द्रशेखर गिरी महाराज ने कहा कि उत्तरकाशी की महिमा इतनी अपरम्पार है कि उसे शब्दों में पूर्ण रूप से बाँधा नहीं जा सकता। यह केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि मोक्ष का जीवंत द्वार है, जहाँ काशी और हिमालय एक होकर शिव की अखण्ड कृपा बरसाते
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