लालकुआँ/लालकुआँ के गांधी नगर वार्ड नं. 2 निवासी, आध्यात्मिक विचारधारा की धनी एवं ममता-करुणा की साक्षात प्रतिमूर्ति श्रीमती शांति देवी राणा का आज शुक्रवार प्रातः 8 बजकर 20 मिनट पर लगभग 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके देहावसान से समूचे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। वे अपने पीछे पाँच पुत्रों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनकी अंतिम यात्रा शनिवार प्रातः 8 बजे चित्रशिला रानीबाग के लिए प्रस्थान करेगी, जहाँ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।
श्रीमती शांति राणा को क्षेत्र में स्नेह और श्रद्धा से “आमा” के नाम से जाना जाता था। यह नाम केवल संबोधन नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व की सजीव पहचान था ममता से भरा हृदय, करुणा से ओतप्रोत स्वभाव और सबको अपनत्व देने वाली आत्मीयता।
उनका जीवन त्याग, सेवा और निष्काम कर्म का अद्भुत संगम था। वे केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक ऐसी आध्यात्मिक चेतना थीं, जिन्होंने अपने जीवन से असंख्य लोगों को प्रेरित किया। दया उनका धर्म था, कर्म उनका साधन और ईश्वर भक्ति उनका आधार। उन्होंने जीवन के हर क्षण को लोकमंगल और मानव सेवा के लिए समर्पित किया।
संघर्षों से भरे जीवन में उन्होंने कई गहरे आघात भी सहे। दो पुत्रों—कुंवर सिंह राणा और गोपाल राणा—के असमय निधन के साथ-साथ एक पुत्री को खोने का असहनीय दुःख भी उन्होंने झेला। किंतु इन विपरीत परिस्थितियों में भी उनका धैर्य, विश्वास और आस्था कभी नहीं डगमगाई। उन्होंने हर पीड़ा को ईश्वरीय इच्छा मानकर स्वीकार किया और जीवन की राह पर अडिग बनी रहीं। यही उनकी आध्यात्मिक ऊँचाई और अदम्य साहस का परिचायक था।
उनकी सादगी, विनम्रता और स्नेहशीलता हर किसी के हृदय को छू जाती थी। वे आत्मा की अमरता और शरीर की नश्वरता को भली-भांति समझती थीं, और यही भाव उनके जीवन में हर पल झलकता था। देवभूमि के मंदिरों और तीर्थस्थलों के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा थी। विशेष रूप से न्यायकारी गोलू देवता और माँ अवंतिका देवी के चरणों में उनकी गहरी आस्था थी।
मूल रूप से कुमाऊँ के रालाकोट (लमगड़ा ब्लॉक) की निवासी शांति राणा का जीवन एक प्रेरणादायक गाथा रहा है। उनके पति स्वर्गीय श्री विशन सिंह राणा भी लालकुआँ की बसासत के प्रमुख स्तंभ रहे, जिनका जीवन भी परोपकार और समाज सेवा को समर्पित था। वर्ष 2023 में उनके निधन के बाद भी “आमा” ने अपने कर्तव्यों और आस्था को दृढ़ता से निभाया।
गरीबों और जरूरतमंदों के दुःख-दर्द में सहभागी बनने वाली यह ममतामयी विभूति आज भले ही हमारे बीच नहीं रही, लेकिन उनकी पावन स्मृतियाँ और उनके द्वारा दिखाया गया मार्ग सदा समाज को आलोकित करता रहेगा।
उनके निधन पर समाजसेवियों, राजनीतिज्ञों एवं आध्यात्मिक जगत की विभूतियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।
निस्संदेह, “आमा” श्रीमती शांति राणा का जीवन ममता, करुणा, सहनशीलता और सेवा का ऐसा प्रकाशपुंज था, जिसकी आभा आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देती रहेगी।
श्रीमती शांति राणा ने अपने जीवन में निष्काम कर्म, ममता और करुणा का आदर्श प्रस्तुत किया, और अपने पीछे पाँच पुत्रों के रूप में अपने संस्कारों की अमूल्य धरोहर छोड़ी। ये पाँच पुत्र न केवल उनके जीवन की जीवित प्रतिमूर्ति हैं, बल्कि उनके आदर्श और शिक्षाओं का निरंतर प्रकाश भी हैं।
चंदन सिंह राणा – माताजी की निष्ठा और सेवा भावना के प्रतीक।
दीवान सिंह राणा – साहस और दूरदर्शिता के साथ समाज और परिवार की सेवा में अग्रसर।
मोहन सिंह राणा – सरलता और कर्मठता के उदाहरण।
नंदन सिंह राणा – संवेदनशील और निष्काम सेवा में समर्पित।
रमेश सिंह राणा – दया और समर्पण के साथ माताजी के आदर्शों का अनुसरण।
इन पाँचों पुत्रों में “आमा” की ममता, करुणा और आध्यात्मिक ऊँचाई की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उनका जीवन मार्ग और आदर्श समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
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