“रामकाज कीन्हें बिना मोहि कहाँ विश्राम” लालकुआँ की श्री राम कथा में राजेन्द्र प्रसाद अग्निहोत्री की निष्काम भक्ति बनी प्रेरणा

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लालकुआँ।
नगर में 18 दिसंबर से आरंभ होने जा रही भव्य श्री राम कथा को लेकर समूचा क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर है। प्रभु श्रीराम के यशगान और कथा आयोजन को सफल बनाने हेतु सभी श्रद्धालु पूरे मनोयोग, सेवा-भाव और समर्पण के साथ रामकाज में जुटे हुए हैं। इन्हीं रामभक्तों में एक प्रमुख नाम है राजेन्द्र प्रसाद अग्निहोत्री, जिनकी निष्ठा, श्रद्धा और कर्मयोग आज सभी के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

श्री अग्निहोत्री जी कहते हैं
“रामकाज कीन्हें बिना मोहि कहाँ विश्राम”,
और वास्तव में उनका यह कथन उनके आचरण में पूर्णतः परिलक्षित होता है। कथा स्थल की व्यवस्थाओं से लेकर सेवाकार्यों तक, वे तन-मन-धन से प्रभु के कार्य में समर्पित दिखाई देते हैं। बिना किसी प्रचार या अपेक्षा के, निस्वार्थ भाव से की जा रही उनकी सेवा सच्ची रामभक्ति का जीवंत उदाहरण है।
स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि श्री अग्निहोत्री की भक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि कर्म में उतरकर समाज को जोड़ने वाली भक्ति है। वे मानते हैं कि श्री राम कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कार, मर्यादा और सेवा भाव को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम है।

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18 दिसंबर से प्रारंभ होने जा रही इस श्री राम कथा में ऐसे ही समर्पित रामभक्तों के सहयोग से लालकुआँ आध्यात्मिक चेतना का केन्द्र बनने जा रहा है। राजेन्द्र प्रसाद अग्निहोत्री जैसे श्रद्धालु यह सिद्ध कर रहे हैं कि जहाँ भाव शुद्ध हो, वहाँ सेवा ही साधना बन जाती है।