पाताल की रहस्यमयी कंदराओं में छुपा है मुक्ति का वो कौन सा गुप्त मार्ग, जो खोलता है सीधे शिवलोक के द्वार?
गंगोलीहाट, पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पावन जिले पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट क्षेत्र में स्थित अलौकिक और दिव्य स्थल पाताल भुवनेश्वर में इन दिनों श्री शिव महापुराण कथा की धूम मची हुई है। वृद्ध भुवनेश्वर और पाताल भुवनेश्वर के इस पावन परिसर में आयोजित इस भव्य कथा के प्रथम दिवस द्वितीय दिवस तृतीय दिवस में श्रद्धालुओं का एक ऐसा अनूठा सैलाब उमड़ा जो आस्था के उस परम रहस्य को जानने के लिए व्याकुल था जो सदियों से इस पावन भूमि के गर्भ में छुपा हुआ है। इस अलौकिक आध्यात्मिक अनुष्ठान के मुख्य यजमान श्री हरीश सिंह भण्डारी एवं उनका समस्त परिवार है जिनकी अगाध श्रद्धा और अभूतपूर्व समर्पण ने इस पूरे क्षेत्र को पूरी तरह से शिवमय कर दिया है।
कथा के प्रथम सोपान पर प्रकाश डालते हुए बेरीनाग से पधारे परम पूज्य कथा व्यास आचार्य राधाकृष्ण जोशी जी ने उपस्थित विशाल भक्तजनों को संबोधित करते हुए शिव महापुराण के उस अद्भुत और रहस्यमयी माहात्म्य को उजागर किया जो मानव जीवन के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने शिव पुराण के श्रवण की दिव्य महिमा बताते हुए उस प्राचीन वृत्तांत को साझा किया जिसमें देवराज को इस पवित्र कथा के सुनने मात्र से साक्षात शिवलोक की प्राप्ति हुई थी। कथा व्यास ने उस परम कौतूहल से भरे प्रसंग को जीवंत किया जहां चंचुला नाम की एक सामान्य महिला के जीवन में अचानक एक ऐसा अलौकिक मोड़ आता है जो उसे पाप के भय से मुक्त कर संसार से पूर्ण वैराग्य की ओर ले जाता है। चंचुला का सांसारिक मोह त्याग कर कठिन तपस्या के मार्ग पर निकल जाना और फिर एक दिव्य ब्राह्मण देव के साक्षात दर्शन पाना किसी महान चमत्कार से कम नहीं था।
इस तीन दिवसीय शिव महापुराण कथा का संपूर्ण सार भक्तों के सम्मुख रखते हुए व्यास पीठ से आचार्य राधाकृष्ण जोशी जी ने संदेश दिया कि मानव जीवन में पाप और पुण्य का द्वंद्व सदैव चलता रहता है परंतु जो जीव सच्चे मन से भगवान शिव की शरण में आता है और इस महापुराण के दिव्य शब्दों को अपने जीवन में ढाल लेता है उसे संसार के सभी लौकिक भयों से मुक्ति मिल जाती है। चंचुला ने अत्यंत करुण भाव से उन ब्राह्मण देव से शिव महापुराण की परम पावन कथा सुनाने का आग्रह किया था। चंचुला ने न केवल उस परम कथा को अत्यंत एकाग्रता और भक्ति भाव से सुना बल्कि उसके गूढ़ माहात्म्य को अपने अंतःकरण में उतार लिया। समय के चक्र के अनुसार कथा का विधि-विधान से पारायण करने के पश्चात जब उसने अपने नश्वर शरीर का त्याग किया तो संपूर्ण ब्रह्मांड उस समय विस्मित रह गया जब उसे सीधे शिवलोक की प्राप्ति हुई। वहां साक्षात भगवान शिव और जगत जननी माता पार्वती ने उसे साक्षात दर्शन दिए और माता पार्वती ने चंचुला की अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर उसे शिवलोक में अपनी प्रिय सखी का स्थान दे दिया जिससे चंचुला को परम सुख और चिर शांति की प्राप्ति हुई। यह पावन कथा केवल एक श्रवण मात्र नहीं बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक अदृश्य और मजबूत सेतु है।
इस पावन अवसर पर पाताल भुवनेश्वर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नीलम भण्डारी और मुख्य यजमान परिवार की ओर से हरीश सिंह भण्डारी ने समस्त क्षेत्रवासियों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक संदेश जारी किया है। मंदिर कमेटी और यजमान परिवार का संयुक्त रूप से कहना है कि पाताल भुवनेश्वर की इन दिव्य और रहस्यमयी गुफाओं के साए में शिव महापुराण का भव्य आयोजन होना पूरे क्षेत्र के लिए एक परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भगवान शिव की यह अलौकिक कथा हमारे परिवारों में सुख, शांति, समृद्धि और नई ऊर्जा का संचार करेगी। इस रहस्यमयी कंदरा के समीप गूंजने वाला हर एक दिव्य मंत्र हमारे भीतर की समस्त नकारात्मकता का समूल नाश कर देगा। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष ने सभी भक्तों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पाताल भुवनेश्वर की गहराइयों में छुपा शिव का यह अलौकिक रहस्य हर श्रद्धालु को आत्मिक शांति की ओर ले जाएगा और आगामी दिनों में भी इस कथा का रसपान कर सभी भक्तगण असीम पुण्य के भागीदार बनेंगे।
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