हल्द्वानी (कमलुवागांजा), 20 अगस्त 2026
देवभूमि कुमाऊं की लोक-संस्कृति, प्रकृति-प्रेम और शिव-पार्वती के अलौकिक वात्सल्य का द्योतक पावन लोकपर्व ‘सातों-आठों’ (गौरा-महेश्वर महोत्सव) गुरुवार को कमलुवागांजा स्थित माँ गिरिजा विहार कॉलोनी में अगाध श्रद्धा, पारंपरिक अनुष्ठानों और अपार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कॉलोनी निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर कुमार पंत के आवास पर आयोजित इस आध्यात्मिक व सांस्कृतिक अनुष्ठान में संपूर्ण परिवेश कुमाऊंनी लोकपरंपरा के दिव्य रंगों और भक्तिमय भजनों से आलोकित हो उठा।

पर्व के शुभारंभ पर कॉलोनी की मातृशक्ति ने पूर्ण निष्ठा और पारंपरिक विधि का पालन करते हुए पवित्र दूर्वा, मौसमी वनस्पतियों और पुष्पों से देवाधिदेव महेश्वर तथा जगज्जननी माँ गौरा के अत्यंत मनोहारी विग्रहों का निर्माण व शृंगार किया। इसके उपरांत आचार्य पुरोहित श्री महेश जोशी जी के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य गौरी-महेश्वर का आह्वान कर विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन संपन्न हुआ। बिरूड़ पंचमी के दिन तांबे के पात्रों में भिगोए गए सात पवित्र अन्नों (चना, मटर, गेहूं, गहत, कलों, राजमा व उड़द) के पावन ‘बिरूड़’ को भगवान शिव और माँ गौरा को समर्पित किया गया। पूजनोपरांत सभी महिलाओं ने सामूहिक रूप से श्रद्धापूर्वक पारंपरिक बणभाट (बाण-भाट) कथा का वाचन व श्रवण किया तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना की।

कुमाऊं अंचल में भाद्रपद मास में मनाए जाने वाले ‘सातों-आठों’ पर्व का विशिष्ट आध्यात्मिक व सामाजिक महत्व है। लोकमान्यता के अनुसार, इन दिनों देवाधिदेव महादेव की अर्धांगिनी माँ गौरा हिमालय स्थित अपने मायके पधारती हैं। पहाड़ की महिलाएं उन्हें अपनी विवाहित बेटी (ध्याण) मानकर उनका भावभीना स्वागत करती हैं, अपने सुख-दुख साझा करती हैं और लोकगीतों के माध्यम से अपनी संवेदनाएं व्यक्त करती हैं। इस पर्व पर अंकुरित ‘बिरूड़’ को संतान की दीर्घायु, निरोगी काया और कृषि संपदा की वृद्धि का मंगल आशीष मानकर शीश पर धारण करने की समृद्ध परंपरा है, जो प्रकृति और मानव जीवन के अटूट संबंधों को दर्शाती है।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान रंग्याली पिछौड़ा धारण कर पारंपरिक वेशभूषा में सजी मातृशक्ति की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमामयी बना दिया। इस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्य रूप से गीता पंत, वीना पंत, दीपा पंत, लीला पंत, सोनी पंत, चंद्रा जोशी, पूजा जोशी, गंगा जोशी, तारा कार्की, भवानी व्यास, खुशबू कार्की, कल्पना कार्की, भुवनेश्वरी पांडे, जयश्री पांडे, कमला खन्नी, पूजा खन्नी, पिंकी खन्नी एवं सुनीता राय सहित कॉलोनी की अनेक महिलाएं व श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन वैदिक शांति पाठ, आरती एवं सभी भक्तों को ‘बिरूड़ा’ व प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
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