हरेला पर्व पर हल्द्वानी में अचानक क्यों जुटी भारी भीड़? जानिए उस ‘चमत्कारी’ पौधे के बारे में जिसने हर किसी को कर दिया आकर्षित

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हल्द्वानी। देवभूमि उत्तराखंड का लोक पर्व हरेला इस बार केवल एक पारंपरिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की नींव रख दी है। हल्द्वानी के जज फार्म क्षेत्र में उस समय भारी उत्साह और कौतूहल का माहौल बन गया, जब लोगों को एक बेहद खास और चमत्कारी गुणों से भरपूर उपहार पाने का अवसर मिला। कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र से वरिष्ठ भाजपा नेता श्री मनोज पाठक के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र के लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया।
दरअसल, यह पूरा आयोजन देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के पर्यावरण संरक्षण के संकल्प और उनके प्रसिद्ध अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के साथ-साथ राज्य के ऊर्जावान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी की प्रेरणा से आयोजित किया गया था। इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए हरेला पर्व के पावन अवसर पर जज फार्म में एक विशेष वृक्षारोपण और पौधा वितरण कार्यक्रम रखा गया था।
जैसे ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई, वहां मौजूद लोगों में उस खास पौधे को प्राप्त करने की उत्सुकता बढ़ गई, जिसे आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों में स्वास्थ्य का खजाना माना जाता है। यह पौधा कोई और नहीं, बल्कि बहुउपयोगी मोरिंगा यानी सहजन का था। पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य संवर्धन के दोहरे उद्देश्य के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में मोरिंगा के पौधों का निशुल्क वितरण किया गया।
इस मौके पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए भाजपा नेता श्री मनोज पाठक ने कहा कि हरेला केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी अगाध श्रद्धा और जिम्मेदारी को याद दिलाने वाला महापर्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। अब यह हर एक नागरिक का परम कर्तव्य है कि वह वृक्षारोपण को अपने दैनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बनाए।
मोरिंगा की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए श्री मनोज पाठक ने आगे कहा कि यह वृक्ष अपने आप में एक संपूर्ण औषधालय है। इसके भीतर भरपूर मात्रा में पोषण और औषधीय गुण छिपे हुए हैं, जो शरीर को निरोगी रखने में बेहद मददगार हैं। इसके साथ ही यह पर्यावरण को भी शुद्ध रखता है। यदि आज प्रत्येक परिवार अपने घर, आंगन या खेत में कम से कम एक मोरिंगा का पौधा लगाने का संकल्प ले और उसकी नियमित देखभाल करे, तो हम आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ समाज, स्वच्छ पर्यावरण और समृद्ध भविष्य सौंपने में सफल हो सकेंगे।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी नागरिकों को मोरिंगा के पौधे सौंपे गए और उनसे अपील की गई कि वे इन्हें अपने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाएं तथा इनकी नियमित देखभाल भी करें। पौधों को पाकर स्थानीय निवासियों के चेहरों पर एक अलग ही संतोष का भाव देखा गया।
इस प्रेरणादायी अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोग साक्षी बने, जिनमें प्रमुख रूप से भरतदास जी, विशम्बर कांडपाल जी, सोनिया जी, आनंद सिंह बिष्ट जी, भगत सिंह बिष्ट जी और कला बिष्ट जी शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने एक सुर में पर्यावरण संरक्षण और उत्तराखंड को और अधिक हरित व समृद्ध बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।