हल्द्वानी।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय संगोष्ठी में एक ओर जहाँ महिला सुरक्षा और उनके सशक्तिकरण पर गंभीर मंथन चल रहा था, वहीं दूसरी ओर प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाली एक प्रमुख शख्सियत को सम्मानित कर इस कार्यक्रम को और भी ऐतिहासिक बना दिया गया।
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा आयोजित इस विस्तृत जागरूकता एवं क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्यभर की महिला पुलिस कर्मियों और विधिक सेवा अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार करना था, ताकि वे प्रदेश के कोने-कोने में जाकर महिलाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा तंत्र के प्रति जागरूक कर सकें।
इस गरिमामयी आयोजन का सबसे खास पल वह रहा जब आयोग द्वारा समाज और प्रकृति के प्रति उत्कृष्ट निष्ठा दर्शाने के लिए पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं जाने-माने पर्यावरणविद डॉ. आशुतोष पन्त को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में वर्षों से निरंतर समर्पित भाव से कार्य कर रहे डॉ. पन्त के योगदान की सभी ने सराहना की।
समारोह में राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती कुसुम कंडवाल, विधायक श्री मोहन सिंह बिष्ट, विश्वविद्यालय के कुलपति श्री नवीन लोहनी तथा जिलाधिकारी श्री ललित मोहन रयाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। मंच पर उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों ने डॉ. आशुतोष पन्त को सम्मानित करते हुए उनके द्वारा प्रकृति संवर्धन हेतु किए जा रहे प्रयासों को संपूर्ण राज्य के लिए प्रेरणादायी बताया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एक सुरक्षित और सशक्त समाज का निर्माण केवल कानूनी जागरूकता से ही नहीं, बल्कि एक स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण से भी जुड़ा हुआ है। मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित होने वाली महिला पुलिसकर्मी और विधिक अधिकारी अब पूरे राज्य में महिला सुरक्षा का नया अध्याय लिखने जा रही हैं, वहीं डॉ. आशुतोष पन्त जैसे विचारकों का सम्मान यह संदेश देता है कि जनसेवा और प्रकृति सेवा ही समाज की सच्ची प्रगति का आधार हैं।
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