बिन्दुखत्ता (नैनीताल)।
उत्तरायणी का पावन पर्व इस बार बिन्दुखत्ता में पाँच दिवसीय मेले के रूप में धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। 12 से 16 जनवरी तक आयोजित इस मेले में लोक संस्कृति की अद्भुत झलक नजर आएगी, और स्थानीय कलाकारों को अपने हुनर का जौहर दिखाने का अवसर मिलेगा।
समिति के अध्यक्ष दीप जोशी ने बताया कि यह मेला अपने आप में अनूठा होने के साथ-साथ लोक संस्कृति से सरोबार रहेगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियाँ दर्शकों के आकर्षण का केंद्र होंगी।
दीप जोशी ने कहा, “उत्तरायणी पर वसुधा का अभिनंदन होगा, जो समूचे क्षेत्र में आदर्श का केंद्र बनेगा। अन्य क्षेत्रों की भांति यहाँ भी सनातन संस्कृति के महत्वपूर्ण अंग मेले में समाहित होंगे। मकर संक्रांति के माध्यम से भारतीय सभ्यता और संस्कृति की झलक विविध रूपों में देखने को मिलेगी।”
शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण को देवताओं का दिन माना गया है, इसलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान और तर्पण जैसे धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। गंगा स्नान एवं गंगातट पर दान को भी अत्यंत शुभ माना जाता है। सूर्य का कर्क और मकर राशियों में प्रवेश धार्मिक दृष्टि से फलदायक है। दिन बढ़ने और रात छोटी होने से प्रकाश अधिक और अंधकार कम होगा।
लोक मान्यता है कि भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं, और महाभारत काल में भी भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का चयन किया था। इसके साथ ही गंगा जी भी इसी दिन भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर समुद्र में सम्मिलित हुई थीं।
दीप जोशी ने कहा कि लोक संस्कृति की इस पावन पर्व की तमाम अद्भुत विशेषताओं की झलक बिन्दुखत्ता के मेले में देखने को मिलेगी।
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