युवा धीरज जोशी की कविता ‘कोकिला : न्याय की देवी’ भक्तों के बीच बनी आस्था का स्वर

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बागेश्वर जनपद के शनि उडियार क्षेत्र निवासी युवा धीरज जोशी द्वारा न्याय की प्रसिद्ध देवी माँ कोकिला कोटगाड़ी को समर्पित की गई एक सुंदर कविता इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच विशेष रूप से पसंद की जा रही है। “कोकिला – न्याय की देवी” शीर्षक से लिखी गई इस भावपूर्ण कविता में माँ कोकिला की न्यायप्रियता, आस्था और भक्तों के अटूट विश्वास को बेहद मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया गया है।
कविता में उत्तराखंड की पवित्र धरती पर विराजी माँ कोकिला कोटगाड़ी देवी के दरबार की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया है कि जब दुनिया में न्याय कमजोर पड़ने लगता है और सत्य की आवाज दब जाती है, तब भक्तों को माँ के दरबार की याद आती है। धीरज जोशी ने अपनी रचना में पिथौरागढ़ जनपद के पांखू गाँव में स्थित माँ कोकिला के पावन धाम की विशेष महिमा का उल्लेख करते हुए लिखा है कि यहाँ सच्चे मन से आने वाले हर व्यक्ति को न्याय मिलता है।
युवा लेखक की यह कविता श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की भावना से परिपूर्ण है, जो सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कई भक्तों और पाठकों ने इस कविता की सराहना करते हुए कहा कि इसमें माँ कोकिला के प्रति सच्ची आस्था और भावनाओं का सुंदर चित्रण किया गया है।
धीरज जोशी की इस रचना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि माँ कोकिला कोटगाड़ी देवी के दरबार में सच्चाई और न्याय की हमेशा जीत होती है तथा भक्तों का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।

कोकिला – न्याय की देवी

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जब दुनिया में इंसान का न्याय कहीं खो जाता है,
जब सच की आवाज़ भी कभी दब जाती है,
तब उत्तराखंड की पवित्र धरती पर
माँ कोकिला का दरबार याद आता है।

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पिथौरागढ़ जिले के पंखू गाँव में विराजी हैं माँ,
जिन्हें श्रद्धा से कोटगाड़ी देवी कहा जाता है।
जहाँ हर दुखी और सच्चे मन वाला इंसान
अपना विश्वास लेकर उनके द्वार आता है।

माँ का दरबार बड़ा न्यायप्रिय है,
यहाँ झूठ और अहंकार नहीं टिक पाते।
जो सच्चे मन से माँ को पुकारे,
माँ उसके साथ हमेशा खड़ी नजर आती हैं।

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न यहाँ दौलत का घमंड चलता है,
न किसी ताकत का सहारा।
माँ के दरबार में बस कर्मों का हिसाब होता है,
और सच को मिलता है सच्चा किनारा।

पांखू की पावन वादियों में आज भी
माँ कोकिला की महिमा गूंजती है।
जो भी सच्चे दिल से उन्हें याद करे,
माँ उसकी हर पुकार सुनती हैं।

हे माँ कोकिला, न्याय की देवी,
हम सब पर अपनी कृपा बनाए रखना।
सच्चाई के रास्ते पर चलने की ताकत देना,
और हर अन्याय से हमें बचाए रखना। 

माँ जब दुनिया साथ छोड़ दे,
तब भी हमारा विश्वास आप ही रहना । 

मेरे मां के बराबर कोई नहीं 

जय माँ कोकिला कोटगाड़ी देवी 

लेखक :- धीरज जोशी

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