मंच सजने से पहले लालकुआं में छाया कौतूहल: पर्दे के पीछे आखिर क्या रच रही ‘आदर्श रामलीला कमेटी’?

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मंच सजने से पहले लालकुआं में छाया कौतूहल: पर्दे के पीछे आखिर क्या रच रही ‘आदर्श रामलीला कमेटी’?

निर्देशक पान सिंह बिष्ट व राजेंद्र रजवार के सधे मार्गदर्शन में तप रहे पात्र; अध्यक्ष बी. सी. भट्ट बोले—”इस बार का मंचन रचेगा नया इतिहास”

लालकुआं। शारदीय नवरात्र की पावन बेला निकट आते ही लालकुआं की फिजाओं में भक्ति, परंपरा और एक अनूठे कौतूहल का रंग गहराने लगा है। ‘श्री आदर्श रामलीला कमेटी, लालकुआं’ के तत्वावधान में इस बार मंच पर क्या नया और भव्य होने जा रहा है, इसे लेकर नगर सहित समूचे क्षेत्र में उत्सुकता चरम पर है। मंच पर पर्दा उठने से पहले ही तालीम कक्षों से गूंजती चौपाइयों और दमदार संवादों ने समूचे वातावरण को राममय बना दिया है।

तराशी जा रही प्रतिभा: निर्देशक द्वय की कड़ी साधना

इस बार मंचन को नई ऊंचाई और शास्त्रीय भव्यता देने के लिए कमेटी के निर्देशक पान सिंह बिष्ट एवं राजेंद्र रजवार पूरी तन्मयता से जुटे हुए हैं। दोनों निर्देशकों की अनुभवी व पारखी नजरों के सामने कलाकार दिन-रात पसीना बहा रहे हैं।

  • संवाद और भाव-भंगिमा: निर्देशक पान सिंह बिष्ट और राजेंद्र रजवार पात्रों के संवाद अदायगी, स्वर के आरोह-अवरोह और सूक्ष्म भाव-भंगिमाओं को बड़ी बारीकी से संवार रहे हैं।
  • जीवंत अभिनय: चाहे प्रभु श्री राम की अलौकिक सौम्यता और मर्यादा हो, भ्राता लक्ष्मण का ओजस्वी तेवर, माता सीता का पावन सतीत्व या फिर लंकापति रावण का दंभ भरा अट्टहास—हर पात्र को जीवंत रूप देने के लिए कलाकारों से कड़ी मेहनत करवाई जा रही है।
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निर्देशन की इस सधी हुई जुगलबंदी ने दर्शकों के भीतर यह सस्पेंस और बढ़ा दिया है कि इस बार मंच पर अभिनय का कौन सा नया रूप देखने को मिलेगा।

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कलयुग में मर्यादा का संबल: प्रभु श्री राम की अमर महिमा

श्री राम की लीला मात्र एक अभिनय नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के लिए सत्य, त्याग, भ्रातृत्व और मर्यादा का सर्वोच्च पथ-प्रदर्शक है। प्रभु राघवेंद्र का जीवन सिखाता है कि भीषणतम संघर्ष और विपरित परिस्थितियों में भी धर्म का मार्ग कैसे निष्कंटक रखा जाता है। रामलीला का मंचन वास्तव में अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की शाश्वत विजय का जीवंत उद्घोष है, जिसकी महिमा युगों-युगों से जनमानस के हृदय में अमिट है।

कमेटी के अध्यक्ष बी. सी. भट्ट का बयान

कमेटी के अध्यक्ष बी. सी. भट्ट ने आगामी आयोजन और तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए कहा:

“प्रभु श्री राम का आदर्श चरित्र हर युग में मानवता का मार्गदर्शन करता है। हमारी रामलीला केवल एक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति और जन-जन की आस्था का महापर्व है। हमारे निर्देशक पान सिंह बिष्ट और राजेंद्र रजवार जिस लगन से कलाकारों को मंच के लिए तैयार कर रहे हैं, वह अद्वितीय है। कलाकारों की यह साधना जब मंच पर उतरेगी, तो दर्शक भाव-विभोर हो उठेंगे। नगर व क्षेत्रवासियों को इस बार एक सर्वथा नया, भव्य और दिव्य मंचन देखने को मिलेगा। मेरा समस्त क्षेत्रवासियों से विनम्र आह्वान है कि वे सपरिवार पधारकर प्रभु श्री राम के चरणों में अपनी हाजिरी लगाएं और इस पावन उत्सव के साक्षी बनें।”

नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक रामलीला को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। कमेटी के सभी पदाधिकारी व सदस्य तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, ताकि नवरात्र के प्रथम दिवस से ही लालकुआं की पावन धरा प्रभु श्री राम के जयकारों से गुंजायमान हो उठे।

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