माँ अवंतिका धाम में आखिर क्यों नतमस्तक हुए श्रद्धालु? जब लोक संस्कृति के साधक और खेल प्रतिभाओं के सारथी का एक साथ हुआ भव्य अभिनंदन!

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माँ अवंतिका धाम में आखिर क्यों नतमस्तक हुए श्रद्धालु? जब लोक संस्कृति के साधक और खेल प्रतिभाओं के सारथी का एक साथ हुआ भव्य अभिनंदन!

लालकुआँ: माँ अवंतिका मंदिर परिसर में उस समय आस्था और आदर का एक अनूठा दृश्य देखने को मिला, जब धर्म, लोक संस्कृति और सामाजिक सरोकारों की त्रिवेणी एक पावन मंच पर साकार हो उठी। मंदिर प्रांगण में उपस्थित भक्तजनों की निगाहें तब ठहर गईं, जब क्षेत्र की दो ऐसी विभूतियों का सम्मान किया गया जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में मौन रहकर समाज को नई दिशा दी है।

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माँ अवंतिका मंदिर समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण खाती के नेतृत्व में मंदिर समिति एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने महाबिन्देश्वर मन्दिर कमेटी के अध्यक्ष व सुप्रसिद्ध लोक गायक शेर सिंह दानू तथा बिंदुखत्ता (तिवारी नगर) निवासी समाजसेवी गोविन्द सांवत का आत्मीय भाव से सत्कार किया।

  • शेर सिंह दानू: अपनी सुरीली तान और मधुर कंठ से पर्वतीय लोक संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाने वाले लोक गायक शेर सिंह दानू का लोक परंपराओं के संरक्षण व संवर्धन में अतुलनीय योगदान रहा है।
  • गोविन्द सांवत: ग्रामीण व स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें निखारने और मंच प्रदान करने के लिए समर्पित समाजसेवी गोविंद सांवत ने युवाओं के भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभाई है।
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समिति पदाधिकारियों ने दोनों विभूतियों को माँ की पावन चुनरी ओढ़ाकर और धार्मिक ग्रंथ ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ पुस्तक सप्रेम भेंट कर उनका गौरव बढ़ाया।

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इस गरिमामयी क्षण के दौरान आचार्य चन्द्र शेखर जोशी, विमल चौधरी और कमलगिरी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी व मातृशक्ति उपस्थित रही। माँ अवंतिका के जयकारों के बीच संपन्न हुए इस सम्मान समारोह ने यह संदेश दिया कि जब समाज की सच्ची प्रतिभाओं और संस्कृति के संरक्षकों का देव दरबार में आदर होता है, तो पूरी देवभूमि गौरवान्वित महसूस करती है।

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