डॉ० राजेन्द्र पाण्डेय ने बताई यज्ञोपवीत की महिमा, कमलुवागांजा में चि० वेदांग का उपनयन संस्कार संपन्न
हल्द्वानी। सनातन धर्म में वर्णित सोलह संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण ‘यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार’ के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ० राजेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि जनेऊ धारण करना केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि यह बालक को संयम, अनुशासन और ज्ञान के मार्ग पर प्रशस्त करने की एक वैदिक दीक्षा है। वे कमलुवागांजा स्थित रीवर वैली कॉलोनी में आयोजित चि० वेदांग के यज्ञोपवीत संस्कार के शुभ अवसर पर उपस्थित स्वजनों और अतिथियों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पण्डित विजय उप्रेती भी मौजूद रहे उन्होंने प० पाण्डेय के साथ विधि विधान के साथ यज्ञोपवीत सम्पन कराया
रविवार (13 गते बैशाख) को श्रीमती जया पन्त एवं श्री गणेश पन्त के सुपौत्र तथा श्रीमती संगीता पन्त एवं श्री आशुतोष पन्त के सुपुत्र चि० वेदांग का यज्ञोपवीत संस्कार वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे विधि-विधान के साथ हर्षोल्लास पूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ० राजेन्द्र पाण्डेय ने यज्ञोपवीत की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि पवित्र धागों वाला यह पवित्र सूत्र ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक होने के साथ-साथ देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण से उऋण होने का भी बोध कराता है। यह संस्कार बटुक (बालक) के बौद्धिक और आध्यात्मिक जन्म का प्रतीक है।
ज्ञात हो कि इस तीन दिवसीय मांगलिक कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार, 24 अप्रैल को शुभलग्नानुसार गणेश पूजा और प्रातः 11 बजे सुवाल पथाई की रस्म के साथ हुआ था। तत्पश्चात शनिवार, 25 अप्रैल को विधि-विधान से गृहजाग संपन्न हुआ। रविवार, 26 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में मुख्य यज्ञोपवीत संस्कार की प्रक्रिया पूर्ण की गई, जिसके बाद दोपहर 1 बजे से भव्य प्रीतिभोज का आयोजन किया गया।
रीवर वैली कॉलोनी (गेट नं० 4 कलश गार्डन के पास) स्थित पन्त परिवार के निवास स्थान पर आयोजित इस समारोह में भारी संख्या में स्नेही स्वजन, इष्ट-मित्र और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने नव-दीक्षित बटुक वेदांग को अपना स्नेह और आशीर्वाद प्रदान किया तथा प्रीतिभोज का प्रसाद ग्रहण कर पन्त परिवार को इस शुभ अवसर की बधाइयां दीं।
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