लालकुआं विधानसभा: 1989 से भाजपा के कर्मठ सिपाही उमेश शर्मा ने पेश की मजबूत दावेदारी, जनसेवा और संघर्ष के दम पर टिकट की प्रबल उम्मीद

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 हल्दूचौड़/लालकुआं। आगामी चुनावों को लेकर लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी से उम्मीदवारी की दौड़ में एक ऐसा नाम प्रमुखता से उभर कर सामने आ रहा है, जिसने अपना पूरा जीवन क्षेत्र के विकास, संगठन की मजबूती और जनसेवा को समर्पित कर दिया है। ये नाम है 54 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा नेता उमेश शर्मा का। वर्ष 2007 से लगातार पार्टी से दावेदारी कर रहे उमेश शर्मा को इस बार पूर्ण विश्वास है कि शीर्ष नेतृत्व उनके दशकों के त्याग, समर्पण और क्षेत्र में उनकी अपार लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें अपना प्रत्याशी अवश्य बनाएगा।

लालकुआं विधान सभा क्षेत्र है कर्मभूमि

उमेश शर्मा ने बाल्यकाल से ही लालकुआं विधानसभा क्षेत्र को ही अपनी असली कर्मभूमि बनाया है। वर्तमान में हल्दूचौड़ के जग्गी बंगर निवासी उमेश शर्मा की जड़ें इस क्षेत्र से गहराई से जुड़ी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बेरीपड़ाव की प्राइमरी पाठशाला से हुई, जिसके बाद उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज हल्दूचौड़ से इंटरमीडिएट और एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी से बीएससी तक की उच्च शिक्षा ग्रहण की। यही कारण है कि वे क्षेत्र के हर गांव, हर गली और यहां की भौगोलिक व सामाजिक परिस्थितियों से भली-भांति वाकिफ हैं।

छात्र राजनीति से लेकर राज्य निर्माण आंदोलन तक का शानदार सफर

उमेश शर्मा के राजनीतिक जीवन का शंखनाद वर्ष 1992 में छात्र संघ चुनावों से हुआ। हालांकि, वे 1989 से ही एक निष्ठावान सिपाही के रूप में भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़ चुके थे। उन्होंने केवल राजनीतिक पदों की ही लालसा नहीं रखी, बल्कि जब भी समाज और देश को जरूरत पड़ी, वे अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन हो या फिर पृथक उत्तराखण्ड राज्य निर्माण का ऐतिहासिक संघर्ष, उमेश शर्मा की भूमिका हमेशा बेहद सक्रिय और प्रेरणादायक रही।

औद्योगिक इकाइयों में युवाओं के रोजगार के लिए किया कड़ा संघर्ष

लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के विकास और यहां के युवाओं के भविष्य को संवारने में उमेश शर्मा का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने क्षेत्र में स्थापित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए समय-समय पर जबरदस्त आंदोलन किए। उनके इन्हीं अनवरत संघर्षों का परिणाम रहा कि क्षेत्र के अनेकों बेरोजगार युवाओं को औद्योगिक इकाइयों में रोजगार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, चाहे सड़क निर्माण की बात हो, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो या गरीबों के हक की लड़ाई, उमेश शर्मा ने हमेशा क्षेत्र के विकास को अपनी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखा है।

संगठन में निभाई अहम जिम्मेदारियां

​एक आम कार्यकर्ता से लेकर शीर्ष दायित्वों तक, उमेश शर्मा ने अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया है। उन्होंने भाजपा में बूथ अध्यक्ष से शुरुआत कर न्याय पंचायत अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, और दो बार जिले के उपाध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां बखूबी निभाईं। इसके अलावा वे युवा मोर्चा के जिला मंत्री और भाजपा उत्तराखण्ड के सह-मीडिया प्रभारी जैसे अहम दायित्वों का भी निर्वहन कर चुके हैं।

​प्रशासनिक और जन प्रतिनिधित्व के मोर्चे पर भी उनका अनुभव शानदार रहा है। वे नैनीताल जिले से जिला पंचायत सदस्य, उत्तराखण्ड शासन में राज्य आंदोलनकारी परिषद के सदस्य और उत्तराखण्ड राज्य सहकारी बैंक के निदेशक सहित कई गरिमामयी पदों पर आसीन रहे हैं।

माता-पिता के संस्कारों से मिली जनसेवा की प्रेरणा

सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सदैव सजग रहने वाले उमेश शर्मा के भीतर मानवीय गुणों का अद्भुत समावेश है। उनके स्वर्गीय पिता श्री मोहन चन्द्र शर्मा जी को क्षेत्र में एक कर्मठ व निष्काम कर्मयोगी के रूप में जाना जाता था। वहीं, उनकी माता श्रीमती कमला देवी भी आदर्श व वात्सल्य की अद्भुत मिसाल हैं। अपने माता-पिता से मिले इन्हीं उच्च संस्कारों के चलते उमेश शर्मा ने समाज सेवा को ही अपना परम धर्म मान लिया है। गरीबों और असहायों के दुख-दर्द में वे आधी रात को भी मदद के लिए तत्पर रहते हैं। उनकी इस निःस्वार्थ सेवा भावना में उनकी धर्मपत्नी सहित समस्त पारिवारिक जनों का उन्हें भरपूर सहयोग मिलता है, जो उनके हौसलों को और भी मजबूत बनाता है।

युवाओं, बुजुर्गों और मातृशक्ति का मिल रहा अपार समर्थन

​वर्ष 2007 से धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार कर रहे उमेश शर्मा इस बार पूरी मजबूती के साथ अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के युवाओं, बुजुर्गों और विशेषकर मातृशक्ति का उन्हें जो अपार स्नेह और समर्थन मिल रहा है, वही उनकी असली पूंजी है। अब देखना यह है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लालकुआं के इस माटी के लाल और निष्ठावान सिपाही के संघर्षों को किस प्रकार सम्मानित करता है।

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