सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल के प्रणेता उद्योग ऋषि स्व० बसंत कुमार बिड़ला जी की पुण्य तिथि पर भावपूर्ण स्मरण

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सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल के प्रणेता उद्योग ऋषि स्व० बसंत कुमार बिड़ला जी की पुण्य तिथि पर भावपूर्ण स्मरण
सनातन धर्म, उद्योग जगत और परोपकार की पावन त्रिवेणी में जब भी किसी ऐसे महापुरुष का नाम लिया जाएगा जिसने पुरुषार्थ को परमार्थ से जोड़ा, तो आदरणीय स्व० श्री बसंत कुमार बिड़ला जी (बी० के० बाबू) का नाम सदैव सर्वोपरि रहेगा। वे केवल एक सफल उद्योगपति नहीं थे, बल्कि आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत एक ऐसे ‘उद्योग ऋषि’ थे, जिनका जीवन सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और संत स्वभाव की जीती-जागती मिसाल था। आज उनकी पुण्यतिथि के इस भावपूर्ण अवसर पर संपूर्ण देश और विशेषकर उत्तराखंड की जनता उन्हें परम श्रद्धा के साथ स्मरण कर रही है।
देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती के प्रति बी० के० बाबू का अगाध और निश्छल प्रेम था। इसी आत्मीय जुड़ाव का मूर्त रूप है कुमाऊं के प्रवेश द्वार लालकुआं (जनपद नैनीताल) में स्थापित ‘सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल’। 1980 के दशक में जब इस मिल की नींव पड़ी, तो समूचे तराई-भाभर क्षेत्र में एक अभूतपूर्व आर्थिक क्रांति का सूत्रपात हुआ। आज यह औद्योगिक संस्थान क्षेत्र के हजारों-लाखों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार स्तंभ बना हुआ है। काश्तकार, ट्रांसपोर्टर, व्यापारी, होटल व्यवसाई और स्थानीय वाहन चालक प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस मिल के माध्यम से अपने जीवन की गाड़ी चला रहे हैं। रोजगार सृजन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य व जनसुविधाओं के विस्तार में सेंचुरी परिवार का निरंतर योगदान स्व० बिड़ला जी की दूरदर्शी सोच और संवेदनशीलता का ही परिणाम है।
यह कारखाना केवल कागज का निर्माण नहीं करता, बल्कि समाज के कमजोर और साधनहीन वर्गों के सपनों को भी संवारता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों व पुलियों का निर्माण हो, निर्धन परिवारों को समय-समय पर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराना हो, या स्थानीय संस्कृति व ऐतिहासिक मेलों का संरक्षण—सेंचुरी परिवार हमेशा अग्रणी भूमिका निभाता आ रहा है। स्थानीय रामलीला कमेटियों और मेला समितियों को मिलने वाला सहयोग यहां की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने में महती भूमिका निभा रहा है। समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा में लाने का जो संकल्प बाबू जी ने लिया था, उसे यह मिल आज भी पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ा रही है।
बी० के० बाबू का संपूर्ण जीवन ‘कर्म ही पूजा है’ के महावाक्य का साक्षात स्वरूप था। बाल्यकाल से ही धर्म और आध्यात्म में उनकी गहरी अभिरुचि थी। वे आजीवन शिव और शक्ति की आराधना में लीन रहे। हिमालय की गोद में बसे प्रकृति की अमूल्य धरोहर बाबा जागनाथ जी की भूमि ‘जागेश्वर धाम’ से उनका एक अलौकिक और आत्मिक नाता था, जिसके चलते वे समय-समय पर देव-कार्यों के लिए वहां आते रहते थे। उनसे मिलने वाले लोग उनकी सौम्य वाणी और दिव्य दर्शन से जीवन की जटिल गुत्थियों को सहज ही सुलझा लेते थे। उनके करीबियों के अनुसार, बाबू जी की प्रेरणा और कृपा किसी वरदान से कम नहीं थी। वे सदैव अपने प्रियजनों को सजग करते थे कि शरीर नश्वर है और आत्मा अमर, इसलिए मनुष्य को हमेशा सत्य और कर्तव्य के पथ पर अडिग रहना चाहिए।
महान उद्योगपति और परोपकारी पुरुष घनश्याम दास बिड़ला जी के सबसे छोटे पुत्र के रूप में जन्मे बसंत कुमार बिड़ला जी ने मात्र 15 वर्ष की अल्पायु में ही पूरी निष्ठा के साथ व्यापारिक जिम्मेदारियों को संभाल लिया था। अपनी नीति-निपुणता और अप्रतिम व्यावसायिक कौशल के बल पर उन्होंने केसोराम इंडस्ट्रीज, सेंचुरी टेक्सटाइल्स और केसी ट्रस्ट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। कॉटन, सीमेंट, पॉलिस्टर, पेपर, शिपिंग, चाय, कॉफी और केमिकल जैसे विविध क्षेत्रों में उनका योगदान भारतीय उद्योग जगत का एक स्वर्णिम अध्याय है।
जीवन के इस सफर में उन्होंने नियति के एक बेहद क्रूर आघात को भी सहा, जब वर्ष 1995 में उनके इकलौते सुयोग्य पुत्र और देश के प्रेरणादायक उद्योगपति श्री आदित्य विक्रम बिड़ला का असमय निधन हो गया। इस गहरे शोक से व्यथित होने के बावजूद उन्होंने विधि के विधान को सहज भाव से स्वीकार किया और अपने निष्काम कर्मयोग के सफर को अंतिम समय तक जारी रखा। 90 वर्ष की आयु में जब उन्होंने अपनी कंपनियों की कमान अपने पोते श्री कुमार मंगलम बिड़ला को सौंपनी चाही, तो आदरणीय कुमार मंगलम जी ने अपने दादा के प्रति अगाध आदर व्यक्त करते हुए कहा था कि आपकी छत्रछाया ही हमारी सबसे अमूल्य धरोहर है, इसलिए आप इस पद पर बने रहें। बाबू जी ने वर्ष 1940 में केसोराम इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर का पद संभाला था और अंतिम समय तक वे कई चैरिटेबल ट्रस्टों और शिक्षण संस्थानों के संरक्षक बने रहे।
98 वर्ष की लंबी और सार्थक आयु में मुंबई की धरती पर तीन 2019 जुलाई उन्होंने अपनी जीवन यात्रा को विराम देकर परमधाम की ओर प्रस्थान किया। आज भले ही वे भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें सदैव हमारे साथ रहेगी
सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन में खुशहाली लाने वाले उद्योग ऋषि स्व० श्री बसंत कुमार बिड़ला जी का अद्वितीय त्याग, कर्मशीलता और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण आने वाली कई पीढ़ियों के कर्मवीरों का मार्गदर्शन करता रहेगा। उनकी इस पावन पुण्य तिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उनकी स्मृतियां और उनके द्वारा जलाई गई विकास की लौ समाज के हृदय में सदैव अमर रहेगी।