लालकुआँ: आस्था और श्रद्धा का केंद्र बनी आई टी सी पेपर मिल न्यू कालोनी में आयोजित श्री काशीदास बाबा पूजन समारोह अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर जनपद नैनीताल सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में शीश नवाया और प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सायंकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
वरिष्ठ समाजसेवी हेमवती नन्दन दुर्गापाल का नागरिक अभिनंदन
समारोह के सांयकालीन सत्र में एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। क्षेत्र के जाने-माने वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता हेमवती नन्दन दुर्गापाल को आयोजन समिति द्वारा शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री नन्दन दुर्गापाल ने कहा, “श्री काशीदास बाबा की महिमा अपरम्पार और अलौकिक है। जो भी भक्त सच्चे हृदय और निष्ठा से अपनी आराधना के श्रद्धासुमन बाबा के चरणों में अर्पित करता है, वह परम कल्याण का भागी बनता है। बाबा के आशीर्वाद से जीवन के समस्त रोग, शोक, दुःख, दरिद्रता और विपदाओं का स्वतः ही हरण हो जाता है।”
गौ-रक्षा, द्वापर युग और भगवान श्री कृष्ण से गहरा जुड़ाव
श्री दुर्गापाल ने बाबा काशीदास को महान गौ-भक्त, गौ-सेवक और गौ-रक्षक के रूप में नमन करते हुए बताया कि उन्हें योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण के अनन्य सखा के रूप में पूजा जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में जब भगवान श्री कृष्ण के आह्वान पर नंद गांव के लोगों ने इंद्र की जगह गोबर्धन पर्वत की पूजा आरंभ की, तब देवराज इंद्र कुपित हो गए और लगातार सात दिनों तक भीषण जलवृष्टि कराई। नंद गांव के ग्वालों और गोवंश पर आए इस संकट के समय बाबा काशीदास के अनुनय-विनय पर भगवान श्री कृष्ण ने कनिष्ठिका उंगली पर गोबर्धन पर्वत उठाकर समस्त जीवों की रक्षा की। अंततः इंद्र का अहंकार टूटा और उन्होंने क्षमा याचना की। तभी से इस पावन पूजन की परंपरा अनवरत चली आ रही है।
महायोगी महात्मा काशीदास जी की तपोभूमि बलिया जिले के दोआबा क्षेत्र को माना जाता है, जबकि उनका समाधि स्थल बक्सर में स्थित है। वे परांकुश मुनि की शिष्य परंपरा के नौवीं पीढ़ी के सन्त स्वामी रामानन्द जी के शिष्य माने जाते हैं। उत्तर भारत में विशेष रूप से यादव व ग्वाला समुदाय के लोग सावन मास में पशुधन की सुरक्षा और कृषि समृद्धि के लिए यह पूजन करते हैं, जिसमें सभी वर्गों की सहभागिता रहती है।
सांस्कृतिक मुकाबला और सांगठनिक सहभागिता
आयोजन समिति के महामंत्री राम पाल यादव के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 8 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजन के साथ हुई। दोपहर 12 बजे से आयोजित विशाल भंडारे में सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद पाया।
शाम को आयोजित भजन संध्या में विशेष आकर्षण भोजपुरी कलाकारों के बीच हुआ “गीत का महामुकाबला” रहा, जिसमें प्रख्यात लोकगायिका कविता बनारसी की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर रात तक भक्ति रस में डुबोए रखा। कार्यक्रम का सफल संचालन न्यू कालोनी प्रबंधकारिणी सदस्य व समस्त भक्तजनों के सहयोग से संपन्न हुआ।
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