“ढलती धूप की ओट में परिंदों की महफ़िल शाम ने शहर को फिर ज़िंदा कर दिया”

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शाम की सुनहरी रोशनी जब शहर की सड़कों पर बिखरने लगी, तब एक सुकून भरा दृश्य सामने आया। दिनभर की आपाधापी के बाद, सड़क के किनारे परिंदों का झुंड दाने चुगते हुए नज़र आया मानो ढलती शाम के साथ प्रकृति भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हो।

थकी हुई सड़कों, धीमी होती रफ्तार और ठहरते शोर के बीच इन नन्हे परिंदों की चहचहाहट ने माहौल को जीवंत कर दिया। यह दृश्य बताता है कि शाम केवल अंधेरा नहीं लाती, बल्कि संवेदनाओं की रौशनी भी साथ लाती है। राह चलते लोगों ने कुछ पल रुककर इस दृश्य को देखा किसी के चेहरे पर मुस्कान आई, तो किसी के मन में अपनापन जागा।

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पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि शाम के समय पक्षियों का इस तरह एकत्र होना प्रकृति के साथ हमारे रिश्ते की याद दिलाता है। यदि शहरवासी थोड़ी संवेदना दिखाएँ पानी, दाना और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराएँ तो ये परिंदे शहर की शामों को और भी खूबसूरत बना सकते हैं।
ढलती शाम का यह दृश्य चुपचाप कह गया
शहर तभी सांस लेता है, जब परिंदे बेख़ौफ़ होकर लौटते हैं।