आत्मशोधन और वैदिक संकल्प का पावन संगम: गायत्री शक्तिपीठ हल्दूचौड़ में श्रद्धा और उल्लास से संपन्न हुआ श्रावणी पर्व व रक्षाबंधन
हल्दूचौड़ (नैनीताल)। गायत्री शक्तिपीठ हल्दूचौड़ के पावन परिसर में 28 अगस्त 2026 को श्रावणी उपाकर्म एवं रक्षाबंधन का महापर्व अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। वैदिक ऋचाओं के मध्य उपस्थित साधकों और परिजनों ने ऋषि परंपरा का निर्वहन करते हुए आत्मिक नवजीवन का संकल्प लिया।
दसस्नान से आत्मशुद्धि और प्रायश्चित विधान
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक परंपरा के अनुसार ‘दसस्नान’ (दशविध स्नान) से हुआ। साधकों ने पवित्र औषधियों, भस्म और पावन द्रव्यों से स्नान कर विगत समय में जाने-अनजाने हुए कायिक, वाचिक एवं मानसिक व्यतिरेकों (दोषों) का प्रायश्चित किया और अंतःकरण की शुद्धि की।
समारोह के प्रमुख आध्यात्मिक सोपान:
- शिखा पूजन एवं यज्ञोपवीत धारण: आत्मशोधन के उपरांत साधकों ने भारतीय संस्कृति की ध्वजा स्वरूप शिखा का पूजन किया। इसके पश्चात पूर्ण विधि-विधान और संकल्प के साथ नवीन यज्ञोपवीत धारण कर सद्ज्ञान व सेवा के मार्ग पर चलने का व्रत दोहराया।
- ऋषि तर्पण: संस्कृति के पोषक महर्षियों, मनीषियों और पितृ शक्तियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए साधकों ने विधिपूर्वक ‘ऋषि तर्पण’ संपन्न किया।
- भव्य गायत्री महायज्ञ: वेद मंत्रों के दिव्य घोष के बीच लोक-कल्याण, आत्मिक उत्थान और वातावरण के परिशोधन के लिए विशेष यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक आहुतियां समर्पित कीं।
यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया गया, जहाँ उपस्थित परिजनों ने परस्पर रक्षासूत्र बांधकर धर्म, संस्कृति और मर्यादा के संरक्षण का संकल्प लिया। शक्तिपीठ के आचार्यों ने श्रावणी पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व निरंतर आत्मनिरीक्षण, संस्कारों के परिष्कार और ऋषि ऋण से मुक्त होने का पावन माध्यम है। पूरे आयोजन के दौरान शक्तिपीठ का वातावरण भक्ति और दिव्यता से सराबोर रहा।
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