क्या वास्तव में रुक जाता है काल का पहिया? बहराइच की धरती से सत्य साधक विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने खोला माँ पीताम्बरी की ‘रहस्यमयी शक्ति’ का राज

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क्या वास्तव में रुक जाता है काल का पहिया? बहराइच की धरती से सत्य साधक विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने खोला माँ पीताम्बरी की ‘रहस्यमयी शक्ति’ का राज

बहराइच। आध्यात्मिक जगत में दस महाविद्याओं की अधिष्ठात्री माँ पीताम्बरी (बगलामुखी) की शक्ति को सदैव अचूक, गोपनीय और पराशक्तियों को भी नियंत्रित करने वाला माना गया है। बहराइच में आयोजित विशेष साधना सत्र व उद्बोधन के दौरान प्रख्यात चिंतक एवं सत्य साधक श्री विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने माँ पीताम्बरी की अलौकिक महिमा और उनकी ‘स्तम्भन शक्ति’ के ऐसे गूढ़ रहस्यों को उजागर किया, जिसने उपस्थित सभी साधकों और श्रद्धालुओं को विस्मय में डाल दिया।

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घोर संकटों को शून्य कर देती है पीताम्बरा शक्ति

श्री विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने कहा कि जब व्यक्ति चारों ओर से अदृश्य संकटों, असाध्य कष्टों और विरोधियों के षड्यंत्रों से घिर जाता है, तब माँ पीताम्बरी की चेतना ही एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनकर उभरती है। गुरुजी के अनुसार, पीताम्बरा शक्ति केवल बाह्य शत्रुओं का शमन नहीं करती, बल्कि मनुष्य के भीतर बैठे भय, निराशा और नकारात्मक वृत्तियों को भी जड़ से ‘स्तम्भित’ (रोक) कर देती है।

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साधना और कृपा प्राप्ति के मुख्य सूत्र:

  • आंतरिक सत्य और निष्ठा: गुरुजी ने स्पष्ट किया कि पीत वर्ण (पीले रंग) की आभा वाली माँ की कृपा आडंबर से नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण और सत्य के मार्ग पर चलने से मिलती है।
  • सुरक्षा चक्र का निर्माण: नियमित मंत्र जप और ध्यान से साधक के इर्द-गिर्द ऐसा सकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र बनता है, जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती।
  • अहंकार का त्याग: यह शक्ति किसी का अहित करने के लिए नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा और संकट निवारण के लिए है। अहंकार का विसर्जन करने वाले साधक को ही माँ अभय का वरदान देती हैं।
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सत्संग के समापन पर गुरुजी ने आह्वान किया कि कलियुग के इस दौर में जब मानसिक और सामाजिक विपदाएं बढ़ रही हैं, तब माँ पीताम्बरी का स्मरण हर साधक को विजय और आत्मिक शांति का मार्ग दिखाता है। इस रहस्यमयी व ओजस्वी उद्बोधन से संपूर्ण वातावरण भगवती के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

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