हल्द्वानी के माँ गिरिजा मंदिर में रक्षाबंधन पर ऐसा क्या हुआ जिसने दोहरा दिया ऋषियों का युग?

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जानिए ब्रह्ममुहूर्त के उस महासंकल्प की पूरी कहानी

हल्द्वानी। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर कमलुवागांजा स्थित गिरिजा विहार कॉलोनी के माँ गिरिजा मंदिर में एक ऐसा दृश्य साकार हुआ, जिसने उपस्थित हर श्रद्धालु को सीधे प्राचीन वैदिक काल की अनुभूतियों से जोड़ दिया। श्री धौलीनाग खन्तोलीजन सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रावणी उपाकर्म एवं जनेऊ पूजन कार्यक्रम में श्रद्धा, आस्था और सनातनी परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।

वैदिक मंत्रोच्चार और हस्तनिर्मित यज्ञोपवीत की प्रतिष्ठा कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 6:00 बजे ब्रह्ममुहूर्त में हुआ। प्रकांड विद्वान पंडित ललित मोहन कोठारी एवं पंडित डॉक्टर प्रकाश रुवाली के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपूर्ण विधि-विधान संपन्न कराया गया। दोनों आचार्यों ने श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक हाथ से निर्मित किए गए विशेष यज्ञोपवीतों (जनेऊ) का विधिवत पूजन व प्रतिष्ठा कराई। इसके उपरांत प्राचीन परंपरा के अनुसार देव-ऋषि तर्पण की प्रक्रिया संपन्न हुई और सभी उपस्थित जनों ने संकल्पबद्ध होकर नया यज्ञोपवीत धारण किया।

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संस्कारों और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का आह्वान समारोह के दौरान वक्ताओं ने सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराओं के संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि श्रावणी उपाकर्म केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि हमारे ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और आत्मशुद्धि के साथ समाज निर्माण का पावन संकल्प है। उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म की मंगलकामनाएं दीं तथा सनातन मूल्यों एवं सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने का प्रण लिया।

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समारोह में इन सभी गणमान्यों की रही गरिमामयी उपस्थिति इस भव्य अनुष्ठान में यजमान प्रकाश पंत, किशोर कुमार पंत (एडवोकेट), नवीन पंत, गिरीश पंत, ललित मोहन पंत, डॉक्टर कैलाश पंत, हरीश चंद्र पंत, घनश्याम पंत, दिवाकर पंत, श्रीश चंद्र कोठारी, चारू चंद्र जोशी, प्रकाश चंद्र जोशी, डी.के. पनेरू, भुवन चंद्र पंत, गोकुलानंद पंत, ललित मोहन पंत और हर्षित पंत सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर वैदिक ध्वनियों और भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।