कहीं डाक से पहुंचती है शादी की पहली चिट्ठी, तो कहीं समंदर में फेंकने पर भी वापस लौट आए बप्पा: जानिए भारत के 10 रहस्यमयी गणेश मंदिर!
*भारत के दस प्रमुख गणेश मंदिर*
(अंजनी सक्सेना-विभूति फीचर्स)
भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य देव हैं। किसी भी मांगलिक कार्य, यज्ञ, अनुष्ठान या नए व्यवसाय के शुभारंभ से पूर्व विघ्नहर्ता श्री गणेश का आह्वान अनिवार्य माना जाता है। भारत के कोने-कोने में गणपति बप्पा के अनगिनत मंदिर स्थापित हैं, लेकिन कुछ मंदिर अपनी प्राचीनता, चमत्कारी मान्यताओं, वास्तुकला और अगाध जन-आस्था के कारण विशेष स्थान रखते हैं।
*श्री सिद्धिविनायक मंदिर (मुंबई, महाराष्ट्र)*
मुंबई के प्रभादेवी इलाके में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की स्थापना 19 नवंबर 1801 को लक्ष्मण विठू और देउबाई पाटिल द्वारा कराई गई थी। सामान्यतः गणेशजी की प्रतिमा में सूंड बाईं ओर मुड़ी होती है, परंतु सिद्धिविनायक में बप्पा की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है। दाईं सूंड वाले गणेशजी को सिद्धपीठ माना जाता है, जो भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण करते हैं। मंदिर का गर्भगृह लकड़ी के दरवाजों पर उकेरी गई अष्टविनायक की छवियों से सुसज्जित है। आम जनमानस से लेकर बॉलीवुड सितारे, उद्योगपति और वैश्विक हस्तियां यहां माथा टेकने आते हैं।
*श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर (पुणे, महाराष्ट्र)*
पुणे का दगडूशेठ हलवाई मंदिर अपनी भव्यता और अटूट आस्था के लिए जाना जाता है। इसका निर्माण 1893 में प्रसिद्ध मिष्ठान विक्रेता श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने अपने पुत्र की प्लेग बीमारी से असमय मृत्यु के बाद करवाया था। मंदिर में स्थापित गणेशजी की मूर्ति 7.5 फीट ऊंची और 4 फीट चौड़ी है, जिसे शुद्ध सोने के आभूषणों से सजाया जाता है।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसी मंदिर के सानिध्य में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां का भव्य पांडाल और रोशनी देखने योग्य होती है।
*त्रिनेत्र गणेश मंदिर (रणथंभौर, राजस्थान)*
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथंभौर दुर्ग के शीर्ष पर यह मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है। इसका निर्माण राजा हम्मीरदेव चौहान ने 1301 ईस्वी में करवाया था। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान गणेश अपने संपूर्ण गृहस्थ परिवार पत्नी रिद्धि-सिद्धि और पुत्र शुभ-लाभ के साथ त्रिनेत्र (तीन आंखों वाले) रूप में विराजमान हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु अपने घर के विवाह या शुभ कार्य का पहला निमंत्रण पत्र (कार्ड) यहां डाक द्वारा भेजते हैं, जिसे मंदिर के पुजारी बप्पा के चरणों में बैठकर उन्हें पढ़कर सुनाते हैं।
*कनिपकम विनायक मंदिर (चित्तूर, आंध्र प्रदेश)*
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित कनिपकम विनायक मंदिर एक ऐतिहासिक तीर्थस्थल है। इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में चोल राजा कुलोतुंग चोल प्रथम द्वारा करवाया गया था। मान्यता है कि यहां स्थित बाहुदा नदी के जल से गणेशजी की प्रतिमा स्वयंभू (स्वयं प्रकट) हुई थी। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह प्रतिमा वर्ष-दर-वर्ष अपने आकार में सूक्ष्म वृद्धि करती है। मंदिर के प्रांगण में स्थित कुएं का जल कभी सूखता नहीं और इसमें स्नान करने से कई विकार दूर होते हैं।
*खजराना गणेश मंदिर (इंदौर, मध्य प्रदेश)*
मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में स्थित खजराना गणेश मंदिर मालवा अंचल की अगाध आस्था का केंद्र है। इस मंदिर का निर्माण 1735 में होल्कर वंश की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। कहा जाता है कि औरंगजेब के शासनकाल में मूर्ति की रक्षा के लिए इसे एक बावड़ी में छिपा दिया गया था, जिसे बाद में निकालकर यहां स्थापित किया गया। यहां भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए मंदिर की पिछली दीवार पर उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं और मन्नत पूरी होने पर पुनः सीधा स्वस्तिक बनाने आते हैं।
*चिंतामन गणेश मंदिर (उज्जैन, मध्य प्रदेश)*
शिप्रा नदी के तट पर बसी पवित्र नगरी उज्जैन में चिंतामन गणेश मंदिर पौराणिक महत्व रखता है। रामायण काल से जुड़े इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता ने इसकी स्थापना की थी। गर्भगृह में तीन प्रतिमाएं एक साथ स्थापित हैं-चिंतामण (चिंताओं को दूर करने वाले), इच्छामन (इच्छाओं को पूर्ण करने वाले) और सिद्धिविनायक (कार्यों में सिद्धि देने वाले)।
*उच्ची पिल्लयार मंदिर (तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु)*
तमिलनाडु के त्रिची शहर में एक 273 फीट ऊंची विशाल चट्टान (रॉकफोर्ट) के शीर्ष पर उच्ची पिल्लयार मंदिर स्थित है, जहां पहुंचने के लिए लगभग 437 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, रावण वध के पश्चात जब विभीषण भगवान श्रीराम से प्राप्त विष्णु प्रतिमा ले जा रहे थे, तब गणेशजी ने बालक का रूप धरकर प्रतिमा को यहीं भूमि पर स्थापित करवा दिया था। सातवीं शताब्दी का यह मंदिर पल्लव और नायक वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है।
*मोती डूंगरी गणेश मंदिर (जयपुर, राजस्थान)*
जयपुर शहर के केंद्र में एक छोटी पहाड़ी पर स्थित मोती डूंगरी गणेश मंदिर उत्तर भारत का प्रमुख धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की स्थापना 1761 में सेठ जयराम पालीवाल द्वारा महाराजा माधोसिंह प्रथम के संरक्षण में की गई थी। यहां विराजमान गणेशजी की मूर्ति मावली (उदयपुर) से लाई गई थी, जो दाहिनी सूंड वाली है। जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में नया वाहन खरीदने पर सर्वप्रथम उसे मोती डूंगरी मंदिर में लाकर पूजा करवाने की अटूट परंपरा है।
*मनकुला विनायगर मंदिर (पुडुचेरी)*
पुडुचेरी के तटीय क्षेत्र में स्थित मनकुला विनायगर मंदिर 300 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। मनकुला का अर्थ होता है रेत का तालाब। फ्रांसीसी शासनकाल के दौरान इस मंदिर को नष्ट करने और प्रतिमा को समुद्र में फेंकने के कई प्रयास किए गए, लेकिन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रतिमा हर बार पुन: उसी स्थान पर प्रकट हो जाती थी। मंदिर की दीवारों पर गणेशजी के 16 अवतारों की सुंदर नक्काशी की गई है।
*गणपतिपुले मंदिर (रत्नागिरी, महाराष्ट्र)*
महाराष्ट्र के कोंकण तट पर स्थित गणपतिपुले मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। अधिकांश मंदिरों में मूर्तियां पूर्व या उत्तरमुखी होती हैं, परंतु यहां गणेशजी की स्वयंभू प्रतिमा पश्चिम दिशा (समुद्र की ओर) उन्मुख है। मंदिर बिल्कुल अरब सागर के किनारे स्थित है और भक्तजन मंदिर की परिक्रमा करने के लिए पूरे पर्वत की परिक्रमा करते हैं, जिसे गिरी प्रदक्षिणा कहा जाता है।
भारत के ये दस प्रमुख गणेश मंदिर न केवल हमारी पौराणिक विरासत और सनातन संस्कृति के प्रतीक हैं, बल्कि देश की स्थापत्य कला एवं विविध जन-विश्वासों को भी दर्शाते हैं। चाहे महाराष्ट्र का सिद्धपीठ क्षेत्र हो, दक्षिण भारत की द्रविड़ स्थापत्य शैली हो या राजस्थान के दुर्ग में विराजित त्रिनेत्र स्वरूप,प्रत्येक धाम में विघ्नहर्ता अपने भक्तों के कष्ट हरने और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करने के लिए विद्यमान हैं। *(विभूति फीचर्स)*
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