काठगोदाम से सीधे बादलों के बीच उड़ेगी केबल कार; ज्योलीकोट बनेगा मुख्य जंक्शन, रेलवे स्टेशन से बस अड्डे तक बनेगा 250 मीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज
हल्द्वानी/काठगोदाम (16 सितंबर, 2026): वीकेंड पर घंटों का थका देने वाला जाम, गाड़ियों का रेंगता काफिला और नैनीताल-कैंची धाम पहुंचने की जद्दोजहद… क्या अब यह सब बीते दिनों की बात होने जा रही है? क्या वाकई सिर्फ 20 से 25 मिनट में सैलानी काठगोदाम से सीधे नैनीताल की वादियों और बाबा नीब करौरी के दरबार कैंची धाम पहुंच सकेंगे?
बुधवार को काठगोदाम सर्किट हाउस में हुई एक अति-महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक ने इस रोमांचक और बहुप्रतीक्षित योजना पर मुहर लगा दी है। प्रमुख सचिव (ऊर्जा, नियोजन एवं सिंचाई) डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में तय हुआ कि देवभूमि के सबसे महत्वाकांक्षी ‘काठगोदाम-हनुमानगढ़ी-कैंची धाम रोपवे प्रोजेक्ट’ को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
2800 करोड़ की लागत, 14.9 किमी हवाई सफर और 58 टावर नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) के प्रोजेक्ट मैनेजर ने योजना का खाका पेश करते हुए बताया कि लगभग 2800 करोड़ रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक रोपवे तैयार होगा।
- कुल दूरी: काठगोदाम से हनुमानगढ़ी तक 14.9 किलोमीटर लंबा हवाई मार्ग।
- टावरों की संख्या: पूरे मार्ग में 58 मजबूत टावर खड़े किए जाएंगे।
- 5 मुख्य स्टेशन: काठगोदाम, रानीबाग, भुजियाघाट, ज्योलीकोट और हनुमानगढ़ी।
- ज्योलीकोट बनेगा बड़ा जंक्शन: यहीं से एक लिंक सीधे देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए कैंची धाम को जोड़ेगा।
- किराया व क्षमता: रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक का प्रस्तावित एकतरफा किराया मात्र ₹375 प्रति व्यक्ति रखा गया है। यह रोपवे प्रति घंटे 1800 यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएगा।
रेलवे स्टेशन से सीधे रोपवे: 250 मीटर लंबा FOB और 33 एकड़ में पार्किंग काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरते ही यात्रियों को सड़क पर भटकना नहीं पड़ेगा। स्टेशन से सीधे रोडवेज परिसर तक 250 मीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज (FOB) बनेगा, जिससे पर्यटक सीधे रोपवे टर्मिनल तक पहुंच जाएंगे। इसके अलावा, रानीबाग में खाली पड़ी 33 एकड़ भूमि पर एक विशाल स्टेशन और भव्य पार्किंग कॉम्प्लेक्स तैयार किया जाएगा, ताकि बाहर से अपनी गाड़ियों से आने वाले सैलानी वहीं वाहन पार्क कर निश्चिंत होकर रोपवे की सवारी कर सकें।
पहाड़ों की संवेदनशीलता पर तकनीकी अध्ययन अनिवार्य बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हल्द्वानी से नैनीताल का पर्वतीय भूभाग भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए बिना पुख्ता तकनीकी अध्ययन के कोई जोखिम नहीं लिया जाएगा। उन्होंने वन विभाग की भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया को तत्काल गति देने और हनुमानगढ़ी टर्मिनल पर जाम न लगे, इसके लिए फुलप्रूफ क्राउड-मैनेजमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए।
रोपवे निर्माण से पहाड़ को मिलेंगे ये क्रांतिकारी फायदे
- समय की भारी बचत: घुमावदार पहाड़ी सड़कों पर जहां 2 से 3 घंटे लगते थे, वहीं अब यह फासला महज 20 से 25 मिनट में तय होगा।
- जाम के जंजाल से मुक्ति: पर्यटन सीजन और छुट्टियों में काठगोदाम-हल्द्वानी-नैनीताल हाईवे पर लगने वाले भीषण जाम से स्थानीय लोगों और पर्यटकों को स्थायी राहत मिलेगी।
- कैंची धाम दर्शन सुगम: ज्योलीकोट जंक्शन से जुड़ने के कारण देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु बिना किसी बाधा के सीधे बाबा के धाम पहुंच सकेंगे।
- पर्यावरण संरक्षण: निजी वाहनों की आवाजाही घटने से पहाड़ों में कार्बन उत्सर्जन, ध्वनि और वायु प्रदूषण में भारी कमी आएगी। साथ ही सड़क चौड़ीकरण की तरह पहाड़ों को अंधाधुंध काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- स्थानीय कारोबार और रोजगार में उछाल: रानीबाग, काठगोदाम और हल्द्वानी के होटल व्यवसाय, होम-स्टे, हैंडीक्राफ्ट, टैक्सी संचालन और टिकटिंग से लेकर मेंटेनेंस तक स्थानीय युवाओं के लिए सैकड़ों नए रोजगार सृजित होंगे।
बैठक में लोक निर्माण विभाग एवं आईटी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) आकाश गंगवार, एडीएम सौरभ असवाल, NHLML के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रशांत जैन, एसडीएम मोनिका सहित लोनिवि, विद्युत, वन एवं सिंचाई विभाग के आला अधिकारी उपस्थित रहे।
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