भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त की जयंती आज धूमधाम से मनाई जाएगी: ‘भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत समारोह समिति’ के मुख्य संयोजक गोपाल सिंह रावत ने दी भव्य आयोजनों की जानकारी

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हल्द्वानी/देहरादून/अल्मोड़ा: महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के प्रमुख सदस्य, उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री एवं देश के पूर्व गृहमंत्री ‘भारत रत्न’ पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त जी की पावन जयंती आज पूरे देश व प्रदेश में अत्यंत गरिमामयी ढंग से मनाई जाएगी। राजधानी देहरादून, उनके गृह जनपद अल्मोड़ा के पैतृक गाँव खूंट सहित समूचे उत्तराखंड में आज विविध प्रेरणादायी, सांस्कृतिक व वैचारिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया जा रहा है।

आज आयोजित होने वाले मुख्य श्रद्धांजलि समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा भाजपा नेता नितिन नवीन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहकर पंडित पन्त जी की प्रतिमा व चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।

‘पन्त जी के आदर्श और राष्ट्र निर्माण का संकल्प आज भी हमारा पथ-प्रदर्शक’ — गोपाल सिंह रावत

‘भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत समारोह समिति’ के मुख्य संयोजक श्री गोपाल सिंह रावत ने जयंती पर आयोजित होने वाले प्रदेशव्यापी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा करते हुए कहा:

“आज का दिन संपूर्ण देवभूमि और राष्ट्र के लिए परम गौरव का दिन है। ‘हिमालय पुत्र’ पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त जी ने स्वाधीनता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत के नवनिर्माण तक जो अमूल्य योगदान दिया, वह युगों-युगों तक स्मरणीय रहेगा। ‘भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत समारोह समिति’ द्वारा आज प्रदेशभर में श्रद्धांजलि सभाओं, विचार गोष्ठियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी को पन्त जी के त्यागमय जीवन, उनकी प्रशासनिक शुचिता, सादगी और राष्ट्रीय एकता के संकल्प से जोड़ा जा सके।”

महामानव पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त: जीवन चरित्र, पैतृक गाँव और अविस्मरणीय योगदान

1. पैतृक गाँव ‘खूंट’ (अल्मोड़ा) और प्रारंभिक जीवन

  • जन्म: पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त का जन्म 10 सितम्बर 1887 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद स्थित सुरम्य एवं ऐतिहासिक ‘खूंट’ (Khunt) गाँव में हुआ था।
  • शिक्षा एवं संस्कार: उनके पिता श्री मनोरथ पन्त तथा माता श्रीमती गोविन्दी बाई थीं। कुशाग्र बुद्धि के धनी गोविन्द बल्लभ ने प्रारंभिक शिक्षा अल्मोड़ा में पूरी करने के बाद प्रयागराज (इलाहाबाद) के प्रसिद्ध म्योर सेंट्रल कॉलेज से कानून (LLB) की परीक्षा सर्वोच्च अंकों से उत्तीर्ण कर स्वर्ण पदक हासिल किया।
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2. स्वाधीनता संग्राम में अद्वितीय पराक्रम: ‘नेहरू जी के लिए बने थे ढाल’

  • काकोरी केस और कुली बेगार प्रथा: वकालत के दौरान ही पन्त जी ने देश सेवा का मार्ग चुना। उन्होंने अमर क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां आदि के काकोरी षड्यंत्र केस की पैरवी की। उत्तराखंड से अमानवीय ‘कुली बेगार प्रथा’ को समाप्त कराने में उनका नेतृत्व ऐतिहासिक रहा।
  • साइमन कमीशन का विरोध (1928): जब लखनऊ में साइमन कमीशन का विरोध हो रहा था, तब अंग्रेजी पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज कर दिया। उस समय पन्त जी अपनी विशाल कद-काठी के साथ पंडित जवाहरलाल नेहरू के ऊपर ढाल बनकर खड़े हो गए। अंग्रेजों की लाठियों के सारे वार उन्होंने अपनी पीठ और गर्दन पर सहे। इस प्रहार से उनका शरीर जीवन भर के लिए थोड़ा झुक गया, लेकिन राष्ट्र के स्वाभिमान को उन्होंने कभी झुकने नहीं दिया।
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3. कुशल प्रशासक और स्वतंत्र भारत के शिल्पकार

  • उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री: आजादी के बाद वे संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश) के पहले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने ऐतिहासिक जमींदारी उन्मूलन कानून लागू कर लाखों निर्धन किसानों को जमीन का वास्तविक मालिकाना हक दिलाया तथा देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय (पंतनगर विश्वविद्यालय) की नींव की परिकल्पना तैयार की।
  • देश के गृहमंत्री (1955–1961): सरदार पटेल के बाद गृहमंत्री के रूप में उन्होंने भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन (States Reorganisation Act) और राजभाषा नीति को अत्यंत कुशलता व सौहार्द से धरातल पर उतारा।
  • ‘भारत रत्न’ सम्मान: राष्ट्र के प्रति उनकी निष्काम और निःस्वार्थ सेवा के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1957 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया।
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संदेश: आज पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त जी की जयंती पर ‘भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत समारोह समिति’ सहित विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक संगठनों द्वारा उनके राष्ट्रभक्ति, शुचिता और समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया जाएगा।

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