वो कौन था जिसने चुपचाप विदा लेकर हजारों दिलों को रुला दिया? बिंदूखत्ता ने खो दिया अपना सच्चा सहारा

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बिन्दुखत्ता/दिन के ठीक बारह बजे थे। हवा में अचानक एक अजीब सी उदासी और गहरा सन्नाटा पसर गया। बिन्दुखत्ता की गलियों से लेकर मूल पैतृक गांव मल्ला सालम पट्टी स्थित छाना गाँव तक, हर जुबान पर बस एक अनकहा डर तैर रहा था। कुछ ही पलों में जब मनहूस खबर की पुष्टि हुई, तो समूचे क्षेत्र की रूह कांप उठी। पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे 62 वर्षीय पंडित ललित मोहन पांडे ने दोपहर लगभग 12 बजे अपनी अंतिम सांस ली और इस संसार को अलविदा कह दिया। जिसने उम्र भर दूसरों के आंसुओं को पोंछने के लिए अपनी हथेलियां फैलाईं, उस कर्मयोगी के महाप्रयाण की खबर सुनते ही आज हर आंख छलछला उठी।

पंडित ललित मोहन पांडे केवल एक नाम नहीं, बल्कि आत्मीयता, त्याग और मानवीय मूल्यों के सजीव स्तम्भ थे। उनका 62 वर्षों का जीवन अनगिनत संघर्षों की एक अद्भुत गाथा रहा, मगर उनके मुखमंडल का आध्यात्मिक तेज और सहज मुस्कान कभी धुंधली नहीं पड़ी। एक पूज्यनीय पुरोहित के रूप में वे घर-घर में अपार श्रद्धा और सम्मान के केंद्र थे। गरीबों और जरूरतमंदों के दुख-दर्द में बिना किसी औपचारिकता के सबसे आगे खड़े रहना उनका स्वभाव था। उनका जाना केवल एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे समाज के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है जिसकी भरपाई शायद कभी संभव न हो सके।

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दोपहर बाद जब उनकी अंतिम यात्रा पवित्र चित्रशिला घाट पहुंची, तो पूरा वातावरण असहनीय सिसकियों और चीत्कारों में डूब गया। जीवन भर अपने स्नेह की छांव से संवारने वाले पिता को जब उनके पुत्र पंकज पाण्डे और भरत पाण्डे ने कांपते हाथों से मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा फट पड़ा। पंडित जी अपने पीछे रोती-बिलखती धर्मपत्नी, दो पुत्रों, एक पुत्री और भाई-बंधुओं से युक्त भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिनका संसार आज अचानक सूना हो गया।

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इस मार्मिक अंतिम विदाई में राजनीतिक और सामाजिक सीमाएं भी बह गईं। शोक व्यक्त करने वालों में पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिश्चंद्र दुर्गापाल,  पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल भाजपा नेता कमलेश चंदोला, पूर्व चेयरमैन कैलाश चन्द्र पन्त, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरेंद्र सिंह बोरा, समाजसेवी हेमवती नंदन दुर्गापाल, प्रकाश उत्तराखंडी, गोवर्धन भट्ट, कुन्दन सिंह बिष्ट, दीप जोशी, विशन दत्त जोशी, खुशाल सिंह फर्त्याल, रमेश चन्द्र पलड़िया, जीवन पाण्डे, गोपाल पाण्डे, पूर्दू परिहार और अवधेश पांडे गौरव पाण्डे कमल पांडे सहित सैकड़ों नम आंखों ने उन्हें अंतिम प्रणाम किया।

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पंचतत्व में विलीन होकर भी पंडित ललित मोहन पांडे अपने परोपकारी कर्मों, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और निस्वार्थ सेवा के रूप में हर उस दिल में हमेशा जीवित रहेंगे, जिसे उन्होंने कभी ढांढस और संबल बंधाया था। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को यह वज्रपात सहने की शक्ति प्रदान करें।

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